"CM पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खत्म", श्री अकाल तख्त के फैसले के बाद तरुण चुग का भगवंत मान पर हमला

Edited By VANSH Sharma,Updated: 23 Jun, 2026 10:29 PM

tarun chugh targets bhagwant mann says he has lost moral right to remain cm

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब के इतिहास में शायद ही कभी इतना शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण समय आया होगा, जब श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ‘गुरु-दोखी’ और...

चंडीगढ़/जालंधर: भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब के इतिहास में शायद ही कभी इतना शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण समय आया होगा, जब श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा ‘गुरु-दोखी’ और ‘पंथ-विरोधी’ घोषित किए जाने के बाद भी कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री की कुर्सी से चिपका बैठा हो।

तरुण चुग ने कहा कि भगवंत मान अब केवल एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं रह गए हैं, बल्कि पंजाब की धार्मिक मर्यादाओं, लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनविश्वास पर लगे एक गंभीर प्रश्नचिह्न बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का उनका नैतिक अधिकार पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि श्री अकाल तख्त साहिब की रिपोर्ट को झुठलाने के लिए पुलिस तंत्र, राज्य मशीनरी, झूठी मनगढ़ंत कहानियों, धनबल और वैकल्पिक फॉरेंसिक रिपोर्ट का सहारा लेने के गंभीर आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। चुग ने कहा कि यदि एक मौजूदा मुख्यमंत्री अपने ही मामले में राज्य की शक्ति का इस्तेमाल कर स्वयं को बचाने की कोशिश करता है, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था पर सीधा हमला है।

उन्होंने कहा कि भगवंत मान पंजाब की जनता का विश्वास, सिख समाज का सम्मान और मुख्यमंत्री पद से जुड़ी हर नैतिक वैधता खो चुके हैं। ऐसे व्यक्ति को एक दिन भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।

तरुण चुग ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा सामाजिक बहिष्कार की घोषणा के बाद अब पंजाब के मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और अफसरों के सामने भी एक गंभीर नैतिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वे एक घोषित ‘गुरु-दोखी’ और ‘पंथ-विरोधी’ व्यक्ति के साथ सार्वजनिक रूप से खड़े रहेंगे या पंजाब की आस्था और मर्यादा का सम्मान करेंगे।

चुग ने पंजाब की जनता, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, सिख संगतों, बुद्धिजीवियों और लोकतांत्रिक शक्तियों से अपील करते हुए कहा कि ‘गुरु-दोखी’ और ‘पंथ-विरोधी’ भगवंत मान का पूर्ण सामाजिक और राजनीतिक बहिष्कार किया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक भगवंत मान पद से नहीं हटते, तब तक उन्हें किसी भी सार्वजनिक मंच पर सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए, किसी धार्मिक आयोजन में विशेष महत्व नहीं दिया जाना चाहिए और सिख आस्था एवं धार्मिक संस्थाओं के नाम पर राजनीति करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

तरुण चुग ने यह भी कहा कि पंजाब में हाल ही में लागू किया गया बेअदबी कानून केवल आम नागरिकों के लिए नहीं हो सकता। यदि कानून सबके लिए समान है, तो इसकी पहली कार्रवाई भगवंत मान के खिलाफ होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पंजाब किसी व्यक्ति विशेष की जागीर नहीं है। सत्ता किसी को कानून, मर्यादा और संस्थाओं से ऊपर नहीं बना सकती। चुग ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की भूमिका तय करने, सभी फॉरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने और सभी गवाहों व शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की।

तरुण चुग ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा, श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक जवाबदेही की रक्षा का संघर्ष है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पंजाब एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दे कि श्री अकाल तख्त साहिब की मर्यादा किसी भी राजनीतिक कुर्सी से बड़ी है और पंजाब की अस्मिता किसी भी मुख्यमंत्री से ऊपर है।

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