Edited By Kalash,Updated: 27 Jun, 2026 02:39 PM

पंजाब के बिजली खपतकारों को राहत देते हुए पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) ने खपतकार शिकायत निवारण फोरम (CGRF) की वित्तीय हद को बढ़ाने को मंजूरी दे दी है।
जालंधर (पुनीत): पंजाब के बिजली खपतकारों को राहत देते हुए पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (PSERC) ने खपतकार शिकायत निवारण फोरम (CGRF) की वित्तीय हद को बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। कमीशन के आदेशों के बाद अब ज्यादा रकम वाले केस भी लोअर लेवल फोरम में सुने जाएंगे, जिससे खपतकारों को शिकायतों के समाधान के लिए हायर लेवल फोरम के कम चक्कर लगाने पड़ेंगे।
कमीशन ने बीते दिनों जारी आदेशों में डिविजनल फोरम की वित्तीय लिमिट 50 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी है। इसी तरह, सर्कल फोरम अब एक लाख रुपये से ज्यादा और 5 लाख रुपये तक के केस सुनेगा, जबकि जोनल फोरम 5 लाख रुपये से ज्यादा और 10 लाख रुपये तक के केस सुनेगा। 10 लाख रुपये से ज्यादा रकम वाले केस कॉर्पोरेट फोरम में सुने जाएंगे। पहले सर्कल फोरम की लिमिट 2 लाख रुपये और जोनल फोरम की लिमिट 5 लाख रुपये तक थी।
पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने कमीशन से सभी फोरम की वित्तीय लिमिट में पांच गुना बढ़ोतरी की मांग की थी। निगम का तर्क था कि 2018 से इन लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। महंगाई, बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और कंज्यूमर्स की बदलती जरूरतों के कारण मौजूदा लिमिट अब काफी नहीं हैं। कॉर्पोरेशन ने यह भी कहा था कि फाइनेंशियल लिमिट कम होने के कारण कई कंज्यूमर्स सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं, जिससे मुकदमे बढ़ते हैं और शिकायतों के निपटारे में देरी होती है। कमीशन ने इस प्रस्ताव पर पब्लिक नोटिस भी जारी किया था और सुझाव और आपत्तियां भी मांगी थीं। दो हिस्सेदारों ने 5 गुना बढ़ोतरी का विरोध करते हुए कहा कि इसके सपोर्ट में काफी फैक्ट्स वाले डेटा पेश नहीं किए गए हैं।
कमीशन ने अपने आदेश में माना कि 2018 से फोरम की फाइनेंशियल लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है और मौजूदा हालात में इसे बढ़ाना जरूरी है। हालांकि, कमीशन ने यह भी कहा कि P.S.P.C.L. 5 गुना बढ़ोतरी के पक्ष में जरूरी फैक्ट्स वाले और वेरिफाइड डेटा पेश नहीं कर सका। इसी वजह से कमीशन ने कॉर्पोरेशन की मांग को पूरी तरह मानने के बजाय, एक लिमिटेड रिवीजन को मंजूरी दे दी। कमीशन ने कहा कि फाइनेंशियल लिमिट बढ़ने से लोकल लेवल पर ज़्यादा केस सॉल्व हो सकेंगे। इससे कंज्यूमर्स का समय और खर्च बचेगा और शिकायतों का जल्दी और असरदार तरीके से सॉल्यूशन पक्का होगा।
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