पंजाब कांग्रेस में घमासान : कार्यकारी प्रधान गिलजियां की दो टूक—एकता नहीं बनी तो 2027 में वापसी मुश्किल

Edited By Urmila,Updated: 03 Jul, 2026 01:52 PM

executive head sangat singh giljian s blunt statement

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर मचे घमासान के बीच पार्टी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है।

पंजाब डेस्क :  पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर मचे घमासान के बीच पार्टी की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाए जाने पर असंतोष जताते हुए बड़ा सियासी कदम उठाया है। चन्नी ने अपने मोरिंडा स्थित आवास पर समर्थक नेताओं की इमरजेंसी बैठक बुलाकर पार्टी हाईकमान को साफ संदेश दे दिया है। इस बैठक को कांग्रेस के भीतर चन्नी का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें कई मौजूदा और पूर्व विधायक तथा वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

इसी बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी प्रधान संगत सिंह गिलजियां ने भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह पार्टी और हाईकमान का सम्मान करते हैं, क्योंकि उन्हें भी दिल्ली से ही जिम्मेदारी मिली है, लेकिन सच्चाई सामने आनी चाहिए। गिलजियां ने बताया कि अध्यक्ष चयन को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी, जिसकी अगुवाई अजय माखन ने की थी। इस कमेटी ने पंजाब भर से 62 से 66 नेताओं—पूर्व मंत्रियों, विधायकों और जिला प्रधानों—की राय लेकर रिपोर्ट तैयार की थी।

गिलजियां के अनुसार उस रिपोर्ट में जनता और नेताओं की भावना के मुताबिक चन्नी का नाम सबसे ऊपर था, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं लिया गया। यही वजह है कि पार्टी में असंतोष और निराशा का माहौल बना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कार्यकर्ताओं में खुशी नहीं है और पार्टी को भारी नुकसान हुआ है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पार्टी में पैदा हो रही फूट नहीं रुकने पर 2027 में सत्ता में वापसी मुश्किल हो जाएगी। “सिस्टम धक्के से नहीं, प्यार और संवाद से चलता है,” कांग्रेस हाईकमान से उन्होंने बड़े नेताओं को भरोसे में लेने और दोबारा विचार करने की जरूरत पर जोर दिया।

गिलजियां ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें चन्नी के घर हो रही बैठक में बुलाया गया था, लेकिन कार्यकारी प्रधान होने के नाते उन्होंने उसमें शामिल न होकर पार्टी के भीतर रहकर समाधान निकालने की बात कही। उनका कहना है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत से ही पार्टी मजबूत हो सकती है।

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