Edited By Urmila,Updated: 11 Apr, 2026 11:41 AM

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए काल बन गई। नाव पलटने की घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 श्रद्धालु अभी भी लापता हैं।
पंजाब डेस्क: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में यमुना नदी शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए काल बन गई। नाव पलटने की घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 श्रद्धालु अभी भी लापता हैं। हादसे के बाद शनिवार को भी बड़े स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू अभियान चलाया गया। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की 250 से ज्यादा लोगों की टीम नदी में उतरी हुई है।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यमुना का बहाव बेहद तेज होने के कारण लापता लोगों की तलाश में मुश्किलें आ रही हैं। आशंका है कि कुछ लोग बहकर काफी दूर निकल गए हों या नदी की कीचड़ और रेत में दब गए हों। इसी वजह से तलाश का दायरा 14 किलोमीटर तक बढ़ा दिया गया है।
हादसा शुक्रवार दोपहर उस वक्त हुआ, जब श्रद्धालुओं से भरी नाव केसी घाट के पास अचानक असंतुलित हो गई और देखते ही देखते नदी में समा गई। नाव में कुल 37 लोग सवार थे। हादसे में एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। मृतकों में मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 लोग शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, हादसे वाली जगह पर यमुना की गहराई करीब 25 फीट है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नाव पर सवार किसी भी यात्री को लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। आसपास मौजूद अन्य नाविकों और पुल की मरम्मत में लगे मजदूरों ने शुरुआत में कुछ लोगों को बाहर निकाला, जिसके बाद प्रशासन ने मोर्चा संभाला।
पुलिस ने इस मामले में नाव मालिक व नाविक पप्पू निषाद को हिरासत में ले लिया है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद वह मौके से फरार हो गया था। नाव उसी की थी और श्रद्धालुओं को उसी ने नदी पार कराने के लिए बैठाया था। हादसे से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें एक में श्रद्धालु डूबने से पहले भजन-कीर्तन करते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में नाव पलटने के बाद लोगों के नदी में गिरने की भयावह तस्वीरें कैद हैं।
लापता लोगों के परिजन वृंदावन पहुंच चुके हैं और घाट किनारे अपनों की एक झलक की उम्मीद लगाए बैठे हैं। प्रशासन ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है और कहा है कि निजी अस्पतालों में भर्ती घायलों की भी सूची तैयार की जा रही है, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो। गौरतलब है कि सभी श्रद्धालु पंजाब के जगराओं से बसों में वृंदावन पहुंचे थे और चार दिन की धार्मिक यात्रा पर थे, लेकिन यह यात्रा कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गई।
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