जालंधर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को झटका, जिला उपभोक्ता आयोग ने अलाटियों के हक में सुनाया फैसला

Edited By Urmila,Updated: 12 Apr, 2026 01:57 PM

setback for jalandhar improvement trust

वर्षों से आर्थिक बदहाली और देनदारियों के बोझ तले दबे जालंधर इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

जालंधर (चोपड़ा): वर्षों से आर्थिक बदहाली और देनदारियों के बोझ तले दबे जालंधर इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ट्रस्ट की विभिन्न स्कीमों में अलाटियों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामलों में अदालतों से आ रहे फैसले उसकी स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

इसी क्रम में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इंदिरापुरम मास्टर गुरबंता सिंह स्कीम से जुड़े 5 मामलों में अलाटियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को करीब 81 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट अलाटियों द्वारा जमा करवाई गई मूल राशि लौटाने के साथ-साथ उस पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 3030 हजार रुपए मुआवजा और 10-10 हजार रुपए कानूनी खर्च भी अदा करना होगा।

आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि ट्रस्ट 45 दिनों के भीतर उक्त राशि का भुगतान नहीं करता, तो ब्याज दर 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दी जाएगी, जिससे ट्रस्ट पर वित्तीय बोझ और बढ़ जाएगा।

इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट ने सोनिया को 4 सितंबर 2000 को एलआईजी फ्लैट नंबर 51 अलाट किया था। अलाटी ने फ्लैट के बदले कुल 4,10,710 रुपए जमा करवाए थे, लेकिन लंबे समय तक कब्जा न मिलने के चलते 13 मार्च 2013 को उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया गया। इस मामले में आयोग ने 27 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए अलाटी के पक्ष में निर्णय दिया और ट्रस्ट को पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए। अब ट्रस्ट पर प्रिंसिपल अमाउंट, ब्याज, मुआवजा और कानूनी खर्च सहित कुल 15.50 लाख रुपये की देनदारी बन गई है।

इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट ने ज्योति वर्मा को 4 सितंबर 2006 को एलआईजी फ्लैट नंबर 72 (5एफ) अलाट किया था। अलाटी ने फ्लैट के बदले कुल 4,26,769 रुपए जमा करवाए थे। लंबे समय तक केवल कागजी कब्जा किए जाने और मूलभूत सुविधाएं न मिलने के कारण 12 मई 2023 को उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया गया। आयोग ने सुनवाई के बाद अलाटी के पक्ष में फैसला देते हुए ट्रस्ट को राशि ब्याज, मुआवजा और खर्च सहित लौटाने के आदेश दिए। कुल देनदारी करीब 16 लाख रुपए बनती है।

इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट ने श्वेता को 4 सितंबर 2008 को एलआईजी फ्लैट नंबर 208 (एसएफ) अलाट किया था। अलाटी द्वारा लगभग 4,71,800 रुपए जमा करवाए गए थे। 19 मार्च 2010 को केवल कागजी कब्जा दिया गया, लेकिन बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई गईं। इसके चलते 12 मई 2023 को केस दायर किया गया। आयोग ने 18 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को राशि ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए। कुल देनदारी लगभग 16 लाख रुपए आंकी गई है।

इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट ने किरण अरोड़ा को 4 सितंबर 2005 को एल.आई.जी. फ्लैट नंबर 225 (एस.एफ.) अलाट किया था। अलाटी ने करीब 5,06,344 रुपए जमा करवाए थे। 14 अक्टूबर 2009 को केवल कागजी कब्जा दिया गया, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गईं। इसके चलते 12 मई 2023 को उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया गया। आयोग ने 18 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को ब्याज, मुआवजा व खर्च सहित राशि लौटाने के आदेश दिए। कुल देनदारी करीब 17 लाख रुपए बनी है।

इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट ने सुरिंदर पाल सिंह को 14 सितंबर 2006 को एलआईजी फ्लैट नंबर 32 (एफ.एफ.) अलाट किया था। अलाटी ने कुल 4,37,933 रुपए जमा करवाए थे। 7 अक्टूबर 2009 को केवल कागजी कब्जा दिया गया। इसके चलते 11 मई 2013 को केस दायर किया गया। आयोग ने 16 मार्च 2026 को फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को राशि ब्याज, मुआवजा और कानूनी खर्च सहित लौटाने के आदेश दिए। कुल देनदारी लगभग 16.50 लाख रुपए बनती है।

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