निचली अदालतों में अंग्रेजी लाजिमी करने का फैसला वापस लिया जाए : खैहरा

Edited By Vatika,Updated: 11 Jul, 2019 08:50 AM

punjab ekta party sukhpal khaira

पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब की निचली अदालतों में अंग्रेजी को दफ्तरी भाषा लाजिमी बनाए जाने की कैप्टन अमरेंद्र सिंह सरकार द्वारा जारी की गई नोटीफिकेशन की सख्त निंदा की है।

चंडीगढ़(रमनजीत): पंजाब एकता पार्टी के प्रधान सुखपाल सिंह खैहरा ने पंजाब की निचली अदालतों में अंग्रेजी को दफ्तरी भाषा लाजिमी बनाए जाने की कैप्टन अमरेंद्र सिंह सरकार द्वारा जारी की गई नोटीफिकेशन की सख्त निंदा की है। खैहरा ने कहा कि यह सरासर विधानसभा का अपमान है, क्योंकि विधानसभा ने पंजाब की दफ्तरी भाषा व दफ्तरी कामकाज के लिए पंजाबी के इस्तेमाल संबंधी एक्ट लागू किया था।

खैहरा ने कहा कि इस तानाशाही आदेश को तुरंत वापस लिया जाए।  यहां जारी बयान में खैहरा ने कहा कि निचली अदालतों में अंग्रेजी भाषा को लाजिमी किया जाना पंजाब विधानसभा की तरफ से पास किए गए संकल्प का उल्लंघन है। इससे चुने हुए प्रतिनिधियों वाले सदन की सर्वश्रेष्ठता को भी ठेस पहुंची है। ऐसी गलत नोटीफिकेशन जारी करने से पहले कैप्टन अमरेंद्र सिंह को इसे विधानसभा में पेश करना चाहिए था। खैहरा ने कहा कि अनेक सूबों में निचली अदालतों ने लोगों और वकीलों की सुविधा के लिए लोकल भाषा को सरकारी भाषा बनाया हुआ है।

पंजाब के लोग पंजाबी भाषा को राज्य की राजधानी और यू.टी. चंडीगढ़ की पहली भाषा बनाने तथा पड़ोसी रा’यों में दूसरी भाषा बनाए जाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस की कैप्टन अमरेंद्र सिंह सरकार द्वारा पंजाबी भाषा का मान और अस्तित्व अपने ही राज्य में खत्म किया जा रहा है।  खैहरा ने कहा कि यह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि पंजाबी भाषा के निचली अदालतों में इस्तेमाल के लिए वह मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास उठाएं। 

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