पंजाब में बसों का फिर होगा चक्का जाम! PUNBUS-PRTC यूनियन ने दी चेतावनी

Edited By Urmila,Updated: 25 Jan, 2026 09:51 AM

punbus prtc union issues ultimatum

पनबस, पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वायदों के मुताबिक अभी तक मांगों का हल नहीं हो पाया है, जिसके चलते वह संघर्ष की राह पर चलने को मजबूर हैं।

जालंधर (पुनीत): पनबस, पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वायदों के मुताबिक अभी तक मांगों का हल नहीं हो पाया है, जिसके चलते वह संघर्ष की राह पर चलने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि तुरंत प्रभाव से मांगों का हल नहीं हुआ तो सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा। यूनियन के प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कर्मचारियों को अपनी आवाज उठाने का अधिकार नहीं मिल रहा। संघर्ष कर रहे कर्मचारियों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद किया गया है। नेताओं ने कहा कि सरकार प्राइवेट घरानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग के निजीकरण की ओर बढ़ रही है और बार-बार किलोमीटर स्कीम के टैंडर जारी किए जा रहे हैं, जबकि यूनियन लगातार इसका विरोध कर रही है।

punbus strike

इस मौके प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों, संयुक्त सचिव जगतार सिंह, जलोर सिंह, रोही राम ने कहा कि किलोमीटर स्कीम के घाटे में होने के पुख्ता प्रमाण सरकार को दिए जा चुके हैं, फिर भी उन्हें नजरअंदाज कर निजीकरण की नीति अपनाई जा रही है। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकारी संस्थान में काम करने वाले कर्मचारियों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

यूनियन ने घोषणा करते हुए कहा कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी डिपो के गेटों पर काले रिबन बांधकर गेट रैलियां और रोष प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद यदि 28 जनवरी की बैठक में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो यूनियन संगरूर में पक्के धरने सहित तीखे संघर्ष का ऐलान करेगी। इसी क्रम में 9 फरवरी को गेट रैलियां, 11 फरवरी को बसें डिपो में खड़ी कर विरोध, तथा 12 फरवरी को पूर्ण हड़ताल कर मुख्यमंत्री पंजाब के आवास के बाहर धरना दिया जाएगा।

मुफ्त बस सुविधा का 1200 करोड़ बकाया

वक्ताओं ने कहा कि पनबस और पी.आर.टी.सी. पर मुफ्त सफर सुविधा के लगभग 1200 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिससे विभाग वेतन देने में असमर्थ हो रहा है। नई बसें खरीदने के लिए बैंकों से लोन लेने की प्रक्रिया को भी मंजूरी नहीं दी जा रही। किलोमीटर स्कीम लगातार घाटे में चल रही है, जबकि सरकार अपनी बसें चलाने के बजाय निजी ठेके को प्राथमिकता दे रही है।

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