Edited By Kalash,Updated: 14 Jul, 2026 11:24 AM

पंजाब सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए ईजी रजिस्ट्री सिस्टम पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जालंधर (चोपड़ा): पंजाब सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए ईजी रजिस्ट्री सिस्टम पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला बार एसोसिएशन ने आज सहायक कमिश्नर वरुण कुमार, तहसीलदार जालंधर -1 गुरप्रीत सिंह और ज्वाइंट सब रजिस्ट्रार जालंधर-2 रवनीत कौर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि मैमोरैंडम ऑफ इक्विटेबल मॉर्गेज (एमओडीटी) के रजिस्ट्रेशन के दौरान कानून में कहीं भी उल्लेख न होने के बावजूद सम्पत्ति के अलग फोटो और अतिरिक्त ग्रुप फोटो की मांग की जा रही है। एसोसिएशन ने इसे न केवल गैरकानूनी बताया, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट आदित्य जैन और सचिव एडवोकेट रोहित गंभीर के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि यदि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया कानून के बजाय मौखिक निर्देशों या मनमानी के आधार पर चलेगी तो इससे लोगों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होगा।
वहीं बार एसोसिएशन ने जिला प्रशासन के सामने कई सीधे और गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पंजीकरण अधिनियम, पंजाब रजिस्ट्रेशन नियमों अथवा किसी सरकारी अधिसूचना में संपत्ति के फोटो और अलग ग्रुप फोटो की अनिवार्यता का कोई प्रावधान ही नहीं है, तो आखिर यह व्यवस्था किसके आदेश पर लागू की जा रही है? एडवोकेट आदित्य जैन ने कहा कि पंजाब सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर एन.जी.डी.आर.एस. 3.0 प्रणाली लागू की, जिसका उद्देश्य रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को डिजिटल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना था। इस प्रणाली के तहत सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड होते हैं, उनकी पूर्व जांच की जाती है, शुल्क ऑनलाइन जमा होता है और अप्वाइंटमैंट भी पोर्टल से जारी होती है। ऐसे में यदि रजिस्ट्रेशन के समय अतिरिक्त दस्तावेज या फोटो मांगे जा रहे हैं, तो यह डिजिटल व्यवस्था की भावना के भी विपरीत है।
एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि एम.ओ.डी.टी. दस्तावेज पर पहले से ही श्रृण लेने वाले व्यक्तियों तथा संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था के अधिकृत प्रतिनिधि के फोटो लगाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्रेशन के समय सरकारी प्रणाली के माध्यम से सभी का सब रजिस्ट्रार के साथ डिजिटल ग्रुप फोटो लिया जाता है, जो रजिस्टर्ड दस्तावेज का स्थायी हिस्सा बनता है और उस पर सभी संबंधित पक्षों के हस्ताक्षर भी होते हैं। ऐसे में अलग से फोटो लेने की आवश्यकता आखिर किस उद्देश्य से पैदा की गई,? यह सबसे बड़ा सवाल है।
एसोसिएशन ने कहा कि एडवोकेट्स, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और आम नागरिकों को ऐसी अनधिकृत प्रक्रियाओं के कारण अनावश्यक परेशानी और समय की बर्बादी झेलनी पड़ रही है। एडवोकेट आदित्य जैन, एडवोकेट रोहित गंभीर व अन्यों ने कहा कि जिला बार एसोसिएशन का उद्देश्य किसी अधिकारी या विभाग को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि कानून का शासन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि वैधानिक प्रक्रिया से हटकर नए नियम बनाए जाएंगे, तो इससे भविष्य में और भी मनमानी का रास्ता खुलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं हुई तो जिला बार एसोसिएशन कानून के दायरे में रहते हुए आगे भी संघर्ष जारी रखेगी। इस मौके पर एडवोकेट नवनीत कोहली, एडवोकेट रविंद्र मनूजा, एडवोकेट ललित कक्कड़, एडवोकेट अशोक सोबती, एडवोकेट पंकज मल्होत्रा, एडवोकेट विवेक सूद, एडवोकेट गुलशन सेठी सहित बड़ी तादाद में एसोसिएशन के मैंबर भी मौजूद थे।
सरकारी दफ्तरों में 'प्राइवेट दखल' पर सवाल, आखिर किसके संरक्षण में सक्रिय हैं बाहरी लोग?
जिला बार एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में कुछ बाहरी एवं कथित अनधिकृत व्यक्तियों की सक्रियता गंभीर चिंता का विषय है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में किसी भी निजी व्यक्ति की भूमिका कानून और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। एसोसिएशन ने मांग की कि ऐसे सभी व्यक्तियों की पहचान कर उनकी भूमिका, जिम्मेदारी और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
फोटो फरमान' का कानूनी आधार बताइए, जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई
जिला बार एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि अतिरिक्त फोटो लेने की व्यवस्था की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए। एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि यदि किसी अधिकारी या निजी व्यक्ति ने अपने स्तर पर ऐसे निर्देश लागू किए हैं, तो उसके विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
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