Edited By Kalash,Updated: 25 May, 2026 01:22 PM

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की कथित तानाशाही और उत्पीड़न के खिलाफ लुधियाना के उद्योगपतियों का गुस्सा फूट पड़ा है।
लुधियाना (राज): पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) की कथित तानाशाही और उत्पीड़न के खिलाफ लुधियाना के उद्योगपतियों का गुस्सा फूट पड़ा है। पीपीसीबी की कार्यप्रणाली से तंग आकर आज शहर भर के कारोबारियों और उद्योगपतियों ने बोर्ड के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए विशाल धरना प्रदर्शन किया। उद्योगपतियों के इस बड़े आंदोलन को देखते हुए प्रशासन के भी हाथ-पांव फूल गए हैं, जिसके चलते धरने वाली जगह पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां) भी खड़ी की गई हैं।
धरने पर बैठे उद्योगपतियों का सीधा और साफ आरोप है कि पीपीसीबी बिना किसी ठोस कानूनी आधार और बिना किसी जांच के औद्योगिक इकाइयों को धड़ाधड़ 'कारण बताओ नोटिस' थमा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बोर्ड की इस मनमानी और उत्पीड़न के कारण न केवल उनका कामकाज पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है, बल्कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है। इस महा-प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सोए हुए बोर्ड और सरकार तक यह कड़ा संदेश पहुंचाना है कि लुधियाना के उद्योगों का यह दमन अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीपीसीबी के खिलाफ शुरू हुए इस महा-संग्राम में लुधियाना की सभी छोटी-बड़ी चाबियां और प्रमुख औद्योगिक संस्थाएं अपनी आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आ गई हैं। इस विशाल प्रदर्शन को शहर की 13 सबसे बड़ी एसोसिएशनों का खुला और सीधा समर्थन मिला है।
इनमें यूनाइटेड साइकिल्स एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (UCPMA), फेडरेशन ऑफ Induस्ट्रीयल एंड कमर्शियल ऑर्गनाइजेशन (FICO), फास्टनर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसोसिएशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्रियल अंडरटेकिंग्स, एपेक्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पंजाब), इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ इंडिया, फास्टनर्स सप्लायर्स एसोसिएशन, लघु उद्योग भारती लुधियाना, लुधियाना स्टील ब्रोकर्स वेलफेयर एसोसिएशन, लुधियाना वायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन, स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन और स्मॉल स्केल मिलर गंज वेलफेयर एसोसिएशन शामिल हैं। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि अगर बोर्ड ने अपनी दमनकारी नीतियां तुरंत बंद नहीं कीं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे पंजाब में फैलाया जाएगा और फैक्ट्रियों की चाबियां सरकार को सौंप दी जाएंगी।
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