भीषण गर्मी में स्कूल बंद करने की बजाय बदला समय, जनता का फूटा गुस्सा

Edited By Kalash,Updated: 23 May, 2026 11:22 AM

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पंजाब में सूर्यदेव की तपिश और भीषण लू के कारण स्कूली विद्यार्थियों का हाल बेहाल है।

लुधियाना (विक्की): पंजाब में सूर्यदेव की तपिश और भीषण लू के कारण स्कूली विद्यार्थियों का हाल बेहाल है। राज्यभर के स्कूलों से बच्चों के उल्टी करने और अत्यधिक गर्मी के कारण बेहोश होने की चिंताजनक खबरें लगातार सामने आ रही हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अभिभावक और अध्यापक उम्मीद लगाए बैठे थे कि पंजाब सरकार सोमवार 25 मई से गर्मियों की छुट्टियों का ऐलान कर देगी परंतु मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा सोशल मीडिया पर सांझा किए गए एक फैसले ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सरकार ने स्कूलों को बंद करने के बजाय 25 मई से सभी सरकारी दफ्तरों, स्कूलों और सभी कक्षाओं का समय सुबह 7.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक करने का आदेश जारी किया है। 

पंजाब सरकार के इस फैसले के खिलाफ आम जनता, अभिभावकों और अध्यापकों में भारी रोष है। लोग लगातार मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से तुरंत छुट्टियां घोषित करने की गुहार लगा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटी हुई है। पहले स्कूल का समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक था और अब इसे 7.30 से 1.30 बजे किया गया है। कुल समय में कोई कटौती नहीं की गई है। दोपहर 1.30 बजे भी उतनी ही जानलेवा धूप और लू होती है जितनी 2 बजे। ऐसे में आधे घंटे की इस हेराफेरी से बच्चों को कोई राहत नहीं मिलने वाली। जनता इसे सरकार की असंवेदनशीलता मान रही है।

जब स्कूल में अध्यापक ही नहीं, तो बच्चों को बुलाकर बीमार क्यों कर रही सरकार? 

अभिभावकों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब स्कूलों में पढ़ाने के लिए स्टाफ ही नहीं है तो बच्चों को इस तपती भट्ठी में भेजने का क्या तुक है? दरअसल, 25 और 26 मई को पंजाब के विभिन्न नगर निगम और नगर कौंसिल चुनावों के कारण भारी संख्या में अध्यापकों और स्कूल स्टाफ की ड्यूटी इलैक्शन में लगाई गई है। इसके अलावा स्टाफ पहले से ही जनगणना ड्यूटी पर तैनात है जो 15 जून तक चलेगी। इसके बाद 27 मई को ईद की छुट्टी है। ऐसे में 28, 29 और 30 मई को छुट्टियां घोषित करने के बजाय जबरन स्कूल खोलकर बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है। जनता का आरोप है कि पंजाब सरकार केवल कागजी खानापूर्ति कर रही है और उसे बच्चों के स्वास्थ्य व जनता की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं है।

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