प्राइवेट स्कूलों के लिए मुसीबत बनी जनगणना, अध्यापक देने लगे नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम

Edited By Kalash,Updated: 17 May, 2026 11:52 AM

teachers census duty

प्रशासन की ओर से लगाई जा रही जनगणना (सैंसस) ड्यूटी इस समय प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों और मैनेजमैंट के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है।

लुधियाना (विक्की): प्रशासन की ओर से लगाई जा रही जनगणना (सैंसस) ड्यूटी इस समय प्राइवेट स्कूलों के अध्यापकों और मैनेजमैंट के लिए एक बड़ी मुसीबत बनकर खड़ी हो गई है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि कई प्राइवेट स्कूलों के कई अध्यापकों ने मैनेजमैंट को लिखित में दे दिया है कि अगर उनसे जबरन जनगणना की ड्यूटी कराई गई तो वे प्राइवेट स्कूल की नौकरी ही छोड़ देंगे और घर बैठना पसंद करेंगे, लेकिन इस ड्यूटी पर नहीं जाएंगे।

इस पूरे मामले में अध्यापकों के परिवारों और उनके परिजनों में भी भारी रोष है। वे अपने घर के सदस्यों को इस ड्यूटी पर भेजने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। दूसरी तरफ स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और अध्यापकों के नाम भेजने के लिए कहा जा रहा है। स्कूलों का आरोप है कि जब वे नाम भेजते हैं और अध्यापक ड्यूटी पर जाने से मना करते हैं तो प्रशासन और संबंधित विभाग की तरफ से स्कूलों पर एफ.आई.आर. और कड़ा एक्शन लेने की धमकियां दी जा रही हैं। स्कूल मैनेजमैंट का कहना है कि उनके सामने 'आगे कुआं, पीछे खाई' जैसी स्थिति बन गई है।

अध्यापकों का सवाल, पढ़े-लिखे बेरोजगारों को क्यों नहीं देते मौका?

ड्यूटी का विरोध कर रहे अध्यापकों का कहना है कि सरकार को इस काम के लिए देश के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को मौका देना चाहिए जिससे उन्हें रोजगार भी मिलेगा। अध्यापकों ने सवाल उठाया कि हम पहले से ही स्कूलों में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, ऐसे में हम डबल-डबल ड्यूटी कैसे संभाल सकते हैं? अगर हम जनगणना के काम में लग गए, तो स्कूलों में हमारी कक्षाओं में बच्चों को कौन पढ़ाएगा? इससे स्कूलों के रिजल्ट खराब होंगे और विद्यार्थियों की पढ़ाई का भी भारी नुकसान होगा। इसके अलावा, कई अध्यापकों का कहना है कि उन्हें शाम के समय भी ड्यूटी करने के लिए कहा जा रहा है जो उनके लिए संभव नहीं है क्योंकि हर किसी के अपने पारिवारिक प्लान और जिम्मेदारियां होती हैं।

वहीं प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा प्राइवेट स्कूलों में आकर जिस तरह से ड्यूटियां बांटी जा रही हैं, उससे स्कूलों का पूरा ढांचा चरमरा गया है। एक स्कूल का उदाहरण सामने आया है जहां करीब 150 टीचर्स का स्टाफ है, वहां एक साथ बड़ी संख्या में ड्यूटियां लगा दी गईं। वहीं एक अन्य स्कूल का मामला सामने आया है जिसमें कुल 85 टीचर्स का स्टाफ है और वहां 85 में से 70 अध्यापकों की ड्यूटी अकेले इस जनगणना कार्य में लगा दी गई है। अब स्कूल पूरी तरह से अध्यापकों से खाली हो चुके हैं। स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि महज 15 अध्यापकों के भरोसे वे पूरे स्कूल के बच्चों को कैसे पढ़ाएं?

मई टैस्ट के बीच सिलेबस पिछड़ने का डर, अभिभावकों को क्या दें जवाब? 

प्राइवेट स्कूलों में इस समय विद्यार्थियों के मई टैस्ट चल रहे हैं। ऐसे में अध्यापकों की ड्यूटियां लग जाने से स्कूलों के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वे बच्चों के एग्जाम कैसे लें और टैस्ट में ड्यूटियां किसकी लगाएं? स्कूलों का कहना है कि इस अव्यवस्था से बच्चों का सिलेबस पूरी तरह से पिछड़ जाएगा, जिससे आने वाले समय में बोर्ड और अन्य परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित होगी। स्कूल प्रबंधकों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि पढ़ाई खराब होती है, तो वे बच्चों के पेरैंट्स को क्या जवाब देंगे? स्कूल इस समय प्रशासन के कड़े प्रैशर और नोटिसों के बीच बुरी तरह पिस रहे हैं।

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