जनगणना ड्यूटी के लिए अब प्राइवेट स्कूलों के स्टाफ के सहारे जिला प्रशासन, मांगे 5 अध्यापकों के नाम

Edited By Vatika,Updated: 12 May, 2026 09:02 AM

district administration now relies on private school staff for census duty

लगता ही कि अगले साल शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी के लिए सरकारी विभागों खासकर सरकारी

लुधियाना (विक्की): लगता ही कि अगले साल शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी के लिए सरकारी विभागों खासकर सरकारी स्कूलों के स्टाफ ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यही वजह है अब लुधियाना प्रशासन को निजी स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटियां भी इस कार्य में लगाने की याद आ गई है। जी हां एक तरफ तो जहां प्रशासनिक कमेटी विभिन्न कारणों का हवाला देकर या सिफारिशों के दम पर सरकारी स्कूलों के अध्यापकों को जनगणना ड्यूटी से हटा रही है वहीं अब गिनती पूरी करने के लिए प्राइवेट स्कूलों पर दबाव बनाया जाने लगा है। 

प्रत्येक स्कूल से कम से कम 5 अध्यापकों का मांगा गया विवरण
जानकारी के मुताबिक जनगणना 2027 को लेकर प्रशासन द्वारा निजी स्कूलों के अध्यापकों की ड्यूटी लगाने की तैयारी ने शिक्षा जगत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। ब्लॉक लुधियाना-2 के बीपीईओ की ओर से निजी स्कूलों को भेजे गए निर्देश में प्रत्येक स्कूल से कम से कम 5 अध्यापकों का विवरण मांगा गया है, जिन्हें Enumerator ड्यूटी पर लगाया जाएगा। इसके साथ उनको भत्ता देने का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन निजी स्कूलों के अध्यापक और प्रबंधन इस पूरी प्रक्रिया को अनुचित दबाव मान रहे हैं। निजी स्कूलों का कहना है कि पेरेंट्स अपने बच्चे हमारे स्कूलों में इसलिए भेजते हैं क्योंकि यहां पढ़ाई होती है अगर अध्यापक ही ऐसी ड्यूटी पर चले गए तो बच्चों को कौन पढ़ाएगा और वे पेरेंट्स को क्या जवाब देंगे?

 निजी स्कूल के प्रिंसिपल को जारी हुआ शो-कॉज नोटिस
अध्यापकों का कहना है कि उनका काम बच्चों को पढ़ाना है, न कि सरकार के अभियान का हिस्सा बनना।  स्कूल संचालकों का सवाल है कि जब राज्य में हजारों पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा नौकरी की तलाश में घूम रहे हैं, तब सरकार उन्हें अस्थायी रोजगार देने की बजाय पहले से कार्यरत अध्यापकों पर अतिरिक्त बोझ क्यों डाल रही है? उनका कहना है कि जनगणना जैसे बड़े कार्य के लिए सरकार अलग भर्ती कर सकती है, जिससे युवाओं को रोजगार भी मिलेगा और स्कूलों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। मामला उस समय और गर्मा गया जब हाल ही में एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल को केवल इसलिए शो-कॉज नोटिस जारी कर दिया गया क्योंकि उन्होंने अपने अध्यापकों के नाम ड्यूटी के लिए नहीं भेजे। इस कार्रवाई को निजी स्कूल प्रबंधन दबाव की राजनीति बता रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार आदेशों के जरिए निजी संस्थानों को मजबूर करना चाहती है।

केवल निजी स्कूलों को निशाना बनाना गलत
अध्यापकों का यह भी कहना है कि निजी स्कूलों में पहले ही सीमित स्टाफ होता है। ऐसे में यदि एक साथ कई अध्यापकों को जनगणना कार्य में लगा दिया गया तो सीधे तौर पर विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। अभिभावक फीस पढ़ाई के लिए देते हैं, लेकिन सरकार शिक्षकों को दूसरे कार्यों में व्यस्त कर रही है।निजी स्कूलों  का कहना है कि यदि सरकार के पास सरकारी स्कूलों में पर्याप्त स्टाफ मौजूद है, तो जनगणना की जिम्मेदारी वहीं के कर्मचारियों को दी जानी चाहिए। केवल निजी स्कूलों को निशाना बनाना गलत है।अब यह मुद्दा धीरे-धीरे पूरे जिले के निजी स्कूलों में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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