Punjab के स्कूलों को दो-टूक : शिक्षा विभाग ने लिया सख्त फैसला, पढ़ें क्या है पूरी खबर

Edited By Vatika,Updated: 30 Apr, 2026 10:30 AM

education department takes strict action

पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षा विभाग

लुधियाना (विक्की) : पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा को सुरक्षित रखने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। विभाग के नोटिस में आया है कि जनगणना (सेंसस) या अन्य सरकारी सर्वे के दौरान प्रशासनिक दफ्तरों द्वारा स्कूलों के कंप्यूटरों और लैब का सहारा लिया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 

दफ्तरों के काम के लिए मंगवाए जा रहे स्कूलों से कंप्यूटर
विभाग ने दो-टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी बाहरी दफ्तर या गैर-शैक्षणिक काम के लिए स्कूलों के कंप्यूटर सिस्टम का प्रयोग नहीं किया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि स्कूलों में चल रहे दाखिला अभियान और विद्यार्थियों की रोजाना की कंप्यूटर क्लास में किसी भी तरह का खलल न पड़े और सरकारी संपत्ति को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके। डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा (पंजाब) के दफ्तर द्वारा राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को जारी पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में सेंसस (जनगणना) का कार्य चल रहा है। इस दौरान कुछ दफ्तरों द्वारा स्कूल की कंप्यूटर लैब में जाकर काम किया जा रहा है या फिर दफ्तरों के काम के लिए स्कूलों से कंप्यूटर मंगवाए जा रहे हैं। 

विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते विभाग ने आदेश
विभाग ने तर्क दिया है कि स्कूलों में इन दिनों विद्यार्थियों के दाखिले का कार्य पूरे जोरों पर चल रहा है। ऐसे में यदि स्कूलों के पास कंप्यूटर ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो दाखिले की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, कंप्यूटरों को बाहर भेजने या बाहरी दखलअंदाजी से विद्यार्थियों की कंप्यूटर शिक्षा और हार्डवेयर को भी नुकसान पहुंचने का डर बना रहता है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देते हुए विभाग ने आदेश दिया है कि सेंसस या किसी भी अन्य गैर-विभागीय काम के लिए किसी भी स्कूल से कंप्यूटर ले जाने या स्कूल की कंप्यूटर लैब इस्तेमाल करने की इजाजत बिल्कुल न दी जाए। यह पत्र सक्षम अथॉरिटी की मंजूरी के बाद जारी किया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और स्कूलों के संसाधन केवल अध्यापन और विद्यार्थियों के लाभ के लिए ही सुरक्षित रखे जाएंगे।

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