Edited By Kalash,Updated: 28 Apr, 2026 12:17 PM

अगर उस सुबह ट्राइडेंट ग्रुप के ढोला प्लांट के कर्मचारी थोड़े भी लापरवाह होते तो शायद यह मामला इतनी जल्दी सामने न आता।
बरनाला (विवेक सिंधवानी): अगर उस सुबह ट्राइडेंट ग्रुप के ढोला प्लांट के कर्मचारी थोड़े भी लापरवाह होते तो शायद यह मामला इतनी जल्दी सामने न आता। मंगलवार तड़के साढ़े पांच बजे जब पूरा शहर गहरी नींद में था, तब पेपर डिवीजन के वुड फाइबर लाइन क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों की पैनी नजर ने एक बड़े खतरे को समय रहते भांप लिया। आसमान से गिरती एक अनजान वस्तु को देखते ही उन्होंने जो सतर्कता दिखाई, उसी की बदौलत आज यह मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच सका। यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि किसी भी सुरक्षा तंत्र की सबसे मजबूत कड़ी आम इंसान की सतर्कता होती है।
अंधेरे में चमकी सतर्कता की मशाल
सुबह का वक्त था, रोशनी कम थी और कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थे। तभी अचानक आसमान से कुछ गिरता हुआ दिखा। किसी और की जगह होती तो शायद लोग इसे नजरअंदाज कर देते या बाद में देखने की सोचते। लेकिन इन कर्मचारियों ने न तो घबराहट में कदम उठाए और न ही मामले को हल्के में लिया। पहले सुरक्षित दूरी से उस वस्तु का जायजा लिया, फिर पास जाकर देखा कि यह एक ड्रोन जैसी वस्तु है और तुरंत शिफ्ट इंचार्ज को सूचित किया। यही सतर्कता आज इस पूरे मामले की नींव बनी।

एक सूचना ने हिला दिया पूरा तंत्र
शिफ्ट इंचार्ज से सूचना मिलते ही एडमिन हेड रूपिंदर गुप्ता मौके पर दौड़े आए। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए फौरन जिला पुलिस प्रमुख मोहम्मद सरफराज आलम को सूचित किया। देखते ही देखते पूरा पुलिस तंत्र हरकत में आ गया। डीएसपी तपा जसकरण सिंह, थाना रूड़ेके के मुख्य अफसर बलविंदर सिंह और साइबर क्राइम की विशेष टीम मौके पर पहुंच गई। साइबर सेल विशेषज्ञ नवजोत चाहल और जसवंत सिंह ने ड्रोन की गहन तकनीकी जांच शुरू की। कर्मचारियों की एक छोटी सी सतर्कता ने पूरे प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को जगा दिया।

सुरक्षा तंत्र के लिए सबक
यह घटना औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा सबक भी है। अगर कर्मचारी सतर्क न होते तो शायद यह ड्रोन किसी के ध्यान में भी न आता और जो भी इसके पीछे था वह अपने मकसद में कामयाब हो जाता। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों को ऐसी संदिग्ध गतिविधियों के प्रति नियमित रूप से जागरूक और प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह ड्रोन किसने उड़ाया और इसके पीछे की असली मंशा क्या थी।
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