Edited By Subhash Kapoor,Updated: 29 Apr, 2026 10:45 PM

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में तैनात कंप्यूटर अध्यापकों के साथ की जा रही वादाखिलाफी की आवाज़ अब दिल्ली की सड़कों पर गूंजेगी। कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन पंजाब ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि वे अब दिल्ली जाकर आम...
लुधियाना (विक्की) : पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में तैनात कंप्यूटर अध्यापकों के साथ की जा रही वादाखिलाफी की आवाज़ अब दिल्ली की सड़कों पर गूंजेगी। कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन पंजाब ने एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि वे अब दिल्ली जाकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय कन्वीनर अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ 'सत्याग्रह' शुरू करेंगे जिस तरह केजरीवाल ने अदालत की कार्यवाही पर न्याय न मिलने का हवाला देते हुए 'सत्याग्रह' का रास्ता चुना है, उसी तर्ज पर अब कंप्यूटर अध्यापक भी उनके हर कार्यक्रम में पहुंचकर अपना विरोध दर्ज करवाएंगे। रोजाना पंजाब के एक जिले से अध्यापकों का जत्था दिल्ली रवाना होगा और आम आदमी पार्टी द्वारा उनके साथ किए गए अन्याय की कहानी जनता को सुनाएगा।
इस संबंधी जानकारी देते हुए प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार मलूका, जसपाल फतेहगढ़ साहिब, लखविंदर सिंह फिरोजपुर, परमवीर सिंह पम्मी, हरचरण सिंह और जतिंदर सिंह सोढ़ी ने बताया कि केजरीवाल अपने अधिकारों और न्याय के लिए तो सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनकी अपनी सरकार पंजाब में हजारों कंप्यूटर अध्यापकों के अधिकारों का गला घोंट रही है। अब अध्यापक केजरीवाल के साथ-साथ चलकर दुनिया को दिखाएंगे कि 'आप' सरकार की कथनी और करनी में कितना बड़ा अंतर है।
2022 के वायदे भूली 'आप' सरकार, अधिकारों का हो रहा हनन
अध्यापक नेताओं ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2022 के चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी ने अध्यापकों के भविष्य को संवारने के जो वायदे किए थे, सत्ता मिलते ही उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। केजरीवाल खुद तो न्यायपालिका पर सवाल उठाकर सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन पंजाब के 6640 कंप्यूटर अध्यापकों को न्याय देने के सवाल पर उनकी पार्टी के नेता मौन धारण कर लेते हैं। नेताओं ने कहा कि अब वे हर उस जगह पहुंचेंगे जहां केजरीवाल मौजूद होंगे और उनके सत्याग्रह के साथ अपना हक मांगेंगे।
शिक्षा मंत्री का 'दिवाली गिफ्ट' निकला महज जुमला
नेताओं ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि 15 सितंबर 2022 को शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने घोषणा की थी कि कंप्यूटर अध्यापकों को दिवाली गिफ्ट के रूप में विभाग में शिफ्ट किया जाएगा और छठा पे-कमीशन लागू होगा। लेकिन आज वर्षों बीत जाने के बाद भी वह ऐलान केवल एक सियासी जुमला और छलावा ही साबित हुआ है। स्कूलों में पिछले 21 सालों से सेवाएं दे रहे अध्यापक आज भी अपने जायज हक के लिए सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर हैं।
विभाग में मर्ज करने और छठे पे-कमीशन की मुख्य मांग
नेताओं ने अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए कहा कि कंप्यूटर अध्यापकों को बिना शर्त शिक्षा विभाग में मर्ज किया जाए और छठे पे-कमीशन का लाभ दिया जाए। साथ ही, मृतक अध्यापकों के परिवारों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द उनकी मांगें नहीं मानीं, तो दिल्ली में केजरीवाल के साथ-साथ चलने वाला यह सत्याग्रह और तेज किया जाएगा और जल्द ही संगरूर की सड़कों पर भी बड़ा संघर्ष छिड़ेगा।