देह व्यापार को लेकर बड़ा खुलासा, कई अमीर नवाबजादे निशाने पर

Edited By Kalash,Updated: 20 Apr, 2026 02:09 PM

big disclosure

सरकार द्वारा नशाखोरी को रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहे हैं परंतु पंजाब में नशा छठे दरिया की तरह बह रहा है 12 साल की उम्र की लड़कियां और छोटे बच्चे भी नशा बेचने चाले गिरोहों के जाल में फस रहे हैं।

लुधियाना (सहगल): सरकार द्वारा नशाखोरी को रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहे हैं परंतु पंजाब में नशा छठे दरिया की तरह बह रहा है 12 साल की उम्र की लड़कियां और छोटे बच्चे भी नशा बेचने चाले गिरोहों के जाल में फस रहे हैं। नशे की लत में फंसी एक युवती ने चौंकाने वाले खुलासे किए कि कैसे उसे से ड्रग्स खरीदने के लिए वेश्यावृत्ति की दुनिया में उतरना पड़ा। 2 साल बाद, वह खुद को इस लत से छुटकारा पाने के लिए स्वयं भी नशा मुक्ति केंद्र आ पहुंची।

डॉ. इंद्रजीत सिंह, निदेशक डॉ. द्वारका नाथ कोटनिस एक्यूपंक्चर अस्पताल एंड एजुकेशन सेंटर ने उपरोक्त जानकारी देते हुए बताया कि लुधियाना में नशे की लत लड़कियों को (वेश्यावृत्ति) देह व्यापार में धकेल रही है और ऐसे के मामले सामने आ चुके हैं। डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि राज्य में छठा दरिया नशों का बह रहा है, परिवारों को इस बात की ज्यादा चिंता है कि आजकल लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी नशे की लत का शिकार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नशे की लत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं लेकिन पंजाब में कम उम्र के लड़के-लड़कियों के लिए कोई नशा मुक्ति केंद्र नहीं है। ओ.आई.डी. सी. नशा मुक्ति केंद्र चलाने वाले डॉ. इंद्रजीत ढींगरा ने कहा कि हम नशे का शिकार हुई हुई लड़की का इलाज एक्यूपंक्चर उपचार के साथ मुफ्त में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्रासदी ऐसी है कि हमारे पास लड़कियों और बच्चों के लिए कोई नशा मुक्ति केंद्र नहीं है।

एक इंजेक्शन के इस्तेमाल तथा असुरक्षित यौन संबंधों से बढे एचआईवी के मामले 

नशे की पूर्ति के लिए एक दूसरे के इंजेक्शन का इस्तेमाल और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एच.आई.वी. के मामलों की संख्या बढ़ रही है। लुधियाना में एच. आई. वी. के 10,000 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, सिविल अस्पताल में स्थित एंटी रेट्रो वायरल सैंटर (ए.आर.टी.सी.) से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि सन 2020-21 में 926 में एच.आई.वी. के पेशेंट की रजिस्ट्रेशन की गई, इनमें 488(52 प्रतिशत के करीब) इंजैक्शन से नशा लेने वाले लोग शामिल थे। सन 2021-22 में 1320 एच.आई.वी. पॉजिटिव लोगों का पंजीकरण किया गया, इनमें से 807 (61 प्रतिशत) इंजैक्शन से नशा लेने वाले लोग शामिल थे।

इसी तरह सन 2022-23 में 1333 एच.आई.वी. के नए मरीज सामने आए इनमें 68. 8 प्रतिशत आई.डी. यू. यानी की इंजैक्टबल ड्रग्स यूजर शामिल थे जबकि अक्तूबर 2023 तक 1443 ने एच.आई.वी. पॉजिटिव लोगो का रजिस्ट्रेशन हो चुका , इनमें से 1097 इंजैक्शन क्शन से नशा लेने वाले मरीज शामिल है। इसी तरह 2024 तथा 2025 में रजिस्टर्ड हुए मरीजों में इंजेक्शन से नशा लेने वाले नशेड़ियों में 60% से अधिक मामले सामने आए हैं

कानून बदलने की जरूरत

डाक्टर द्वारकानाथ कोटनिस अस्पताल और एजुकेशन सैंटर के महासचिव रिटायर्ड आई.पी.एस. इकबाल सिंह गिल ने कहा कि लोगों को नशाखोरी से हटाने के लिए एन.डी.पी.एस. कानून बदलने की जरूरत है, नए नशा मुक्ति केंद्र खोलने के लिए आसान नियम बनाने चाहिए ताकि लोगों को नशे तो मुक्ति मिल सके। नशाखोरी से बचने के लिए परंपरागत नशों अफीम डोडे जैसे नशों को मान्यता देनी होगी ताकि युवा पीढ़ी को चिट्टे के नशे से बचाया जाए।

अफीम और परंपरागत नशों से शारीरिक और मानसिक नुकसान कम है। चिट्टे पर लगे नशेड़ियों को नशा छुड़ाना मुश्किल जबकि अफीम आदि पर लगे नशेड़ियों से नशा छुडाना आसान होगा, इससे एच.आई.वी. व एड्स के मामले भी कम होंगे।

नशे का शिकार हुई युक्तियां अब वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर इनके जाल में कई नवाबजादे भी 

ड्रग लेने वाली लड़कियों जो देह व्यापार के धंधे में लिप्त पाई जाती हैं विशेषज्ञ द्वारा यह अशंकायह अशंका व्यक्त की जा रही है कि इनमें से कोई एचआईवी पीड़ित हो सकती है दूसरी और यह भी चर्चा है कि इनके जाल में कई युवा नवाब फस चुके हैं क्योंकि नशा पूर्ति के लिए युवतियों को पैसा चाहिए जिसके लिए वह देह व्यापार में उतरी हैं बताया जाता है कि शहर में कई ऐसी जगह है जहां पर युवकों को नशे का सामान उपलब्ध कराया जाता है हुक्का पेश करना भी इसमें शामिल है सरकार के नशाखोरी के विरुद्ध बढ़ते दबाव के कारण अब यह धंधा चोरी छुपे शहर के कई हिस्सों में चल रहा बताया जाता है जिसमें जालंधर रोड के अलावा बस स्टैंड के आसपास का इलाका इनका गढ़ बताया जाता है शहर के भीतरी इलाकों मैं अमीरजादो को फसाने की कोशिश करती दिखाई देती है इसके अलावा हाईवे पर भी यह युक्तियां आते-जाते वाहनों को हाथ देते हुए देखी जा सकती है सूत्र बताते हैं कई बार पाश इलाके के लोग भी उनके फेर में देखे जाते हैं।

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