Edited By Subhash Kapoor,Updated: 27 May, 2026 07:50 PM

भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। कानून के रखवाले ही जब भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाए, इसका एक बेहद शर्मनाक उदाहरण थाना डिवीजन नंबर 8 में देखने को मिला।
लुधियाना (राज/अनिल): भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। कानून के रखवाले ही जब भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी कहाँ जाए, इसका एक बेहद शर्मनाक उदाहरण थाना डिवीजन नंबर 8 में देखने को मिला। यहाँ तैनात एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) को विजिलेंस की टीम ने एक मजबूर पिता से उसकी लापता बेटी की रिपोर्ट दर्ज करने के नाम पर हजारों रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। विजिलेंस की इस अचानक हुई कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई हैबोवाल कलां के रहने वाले राम ईश्वर की लिखित शिकायत पर अमल में लाई गई है। पीड़ित राम ईश्वर ने विजिलेंस को दिए अपने बयानों में बताया कि उनकी बेटी अचानक लापता हो गई थी, जिसकी तलाश और कानूनी रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए वह लगातार पुलिस स्टेशन के चक्कर काट रहे थे। लेकिन थाने में तैनात ए.एस.आई. उनकी मदद करने और कानूनी फर्ज निभाने की बजाय मामले को लटका रहा था। आरोप है कि एएसआई ने लापता लड़की की एफ.आई.आर. और आगे की तफ्तीश शुरू करने के बदले में पीड़ित पिता के सामने 14,000 रुपये की रिश्वत की मोटी मांग रख दी।
बेबस पिता रिश्वतखोर अधिकारी को पैसे नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने हिम्मत जुटाकर सीधे विजिलेंस ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया। शिकायत की सत्यता की जांच करने के बाद विजिलेंस की टीम ने तुरंत जाल बिछाया। तय रणनीति के तहत जैसे ही पीड़ित राम ईश्वर ने आरोपी ए.एस.आई. हरदीप सिंह को रिश्वत के 14,000 रुपये थमाए, वैसे ही पहले से घात लगाकर बैठी विजिलेंस की विशेष टीम ने दबिश दे दी। टीम ने आरोपी अधिकारी को रंगे हाथों काबू कर लिया और उसके पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी एएसआई के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून (विजिलेंस एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की गहन पूछताछ जारी है।
