POCSO केस में अकाली नेता को नहीं मिली राहत, गिरफ्तारी कभी भी संभव

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 19 May, 2026 09:00 PM

akali leader denied relief in pocso case

शिरोमणि अकाली दल के हल्का दाखा इंचार्ज जसकरणजीत सिंह देओल के खिलाफ दर्ज हाई-प्रोफाइल केस में आज नया मोड़ सामने आया। अदालत के आदेशों की पूरी कॉपी सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने न तो मामला रद्द किया है और न ही आरोपी को कोई क्लीन चिट...

लुधियाना : शिरोमणि अकाली दल के हल्का दाखा इंचार्ज जसकरणजीत सिंह देओल के खिलाफ दर्ज हाई-प्रोफाइल केस में आज नया मोड़ सामने आया। अदालत के आदेशों की पूरी कॉपी सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत ने न तो मामला रद्द किया है और न ही आरोपी को कोई क्लीन चिट दी है।

अदालत ने अपने आदेशों में केवल यह कहा है कि गिरफ्तारी के समय कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था, जिसके कारण उस समय की गिरफ्तारी को तकनीकी आधार पर गैरकानूनी माना गया। अदालत ने पुलिस को सख्त फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि गिरफ्तारी के दौरान रह गई कमियों को तुरंत पूरा करके आरोपी को दोबारा हिरासत में लिया जाए और मामले की गहराई से जांच की जाए।

पुलिस अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

इस मामले में अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने इतने संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया में छोड़ी गई बड़ी खामियों को लेकर संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि क्या ये खामियां सिर्फ लापरवाही थीं या फिर किसी राजनीतिक दबाव, मिलीभगत या प्रभाव के चलते आरोपी को कानूनी राहत दिलाने के लिए जानबूझकर छोड़ी गई थीं। जानकारी के मुताबिक इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो सकती है।

गौरतलब है कि बीते दिन शिरोमणि अकाली दल (बादल) के मुख्य प्रवक्ता द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह दावा किया गया था कि अदालत ने जसकरणजीत सिंह देओल को “जमानत” दे दी है और केस रद्द कर दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया था कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना के तहत हल्का विधायक के कहने पर राज्य सरकार की मंजूरी से पुलिस द्वारा बिना किसी आधार के दर्ज किया गया था। लेकिन अब अदालत के आदेशों की सच्चाई सामने आने के बाद अकाली दल खुद सवालों के घेरे में आ गया है।

क्या है पूरा मामला?

मोहाली के मटौर थाने में दर्ज इस मामले में साढ़े 14 साल की नाबालिग लड़की के साथ यौन शोषण, मारपीट, जान से मारने की धमकियां और पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

अदालती आदेशों की सच्चाई सामने आने के बाद लोगों और राजनीतिक हलकों में शिरोमणि अकाली दल की नैतिकता पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। कभी पंथक और जनहित के मुद्दों की अगुवाई करने वाली पार्टी माने जाने वाले अकाली दल (बादल) पर अब आरोप लग रहे हैं कि वह पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में घिरे नेताओं का खुलकर बचाव कर रही है।

क्या कहना है पुलिस अधिकारियों का?

जब इस मामले को लेकर मोहाली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हाई-प्रोफाइल पॉक्सो केस में आरोपी जसकरणजीत सिंह देओल की तलाश जारी है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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