Edited By Subhash Kapoor,Updated: 19 May, 2026 08:41 PM

पंजाब में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच अनुसूचित जातियों की सूची में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने कथित तौर पर वाल्मीकि समुदाय के लिए उपयोग किए गए शब्दों को अपमानजनक बताए...
पंजाब डैस्क : पंजाब में आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच अनुसूचित जातियों की सूची में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने कथित तौर पर वाल्मीकि समुदाय के लिए उपयोग किए गए शब्दों को अपमानजनक बताए जाने की शिकायत पर जनगणना डायरैक्टर को जवाब तलब करने को कहा है।
यह मामला तब गरमाया जब राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने शिकायत देकर कहा कि जनगणना से जुड़े दस्तावेजों में कुछ ऐसे शब्द शामिल हैं, जिन्हें समुदाय जातिवादी और आपत्तिजनक मानता है। इसके बाद NCSC ने पंजाब के जनगणना निदेशक और सामाजिक न्याय विभाग के प्रमुख सचिव को 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) देने के निर्देश जारी कर दिए।
आयोग ने साफ किया है कि समय पर जवाब न मिलने की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर तलब किया जा सकता है।
विवाद का केंद्र पंजाब की अनुसूचित जातियों की आधिकारिक सूची में शामिल वे शब्द हैं, जो वर्षों से सफाई कर्मचारी और वाल्मीकि समुदाय के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। हालांकि समुदाय का एक वर्ग अब इन्हें सम्मान के खिलाफ मान रहा है।
वहीं जनगणना संचालन निदेशक नवजोत खोसा का कहना है कि यह कोई नई सूची नहीं है। यही सूची 2011 की जनगणना में भी इस्तेमाल हुई थी और इसका उद्देश्य केवल जातिगत आंकड़े जुटाना है, किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना नहीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनगणना 2027 से पहले सरकार इन शब्दों में बदलाव करेगी, या फिर यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।