Edited By Subhash Kapoor,Updated: 28 Apr, 2026 12:04 AM

औद्योगिक नगरी लुधियाना में राष्ट्रीय प्रतीकों की देखरेख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जगराओं पुल पर फटे राष्ट्रीय ध्वज का मामला सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट हो रहा है कि शहर के कई अन्य स्थानों पर भी तिरंगे की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
लुधियाना ( गणेश/सचिन ): औद्योगिक नगरी लुधियाना में राष्ट्रीय प्रतीकों की देखरेख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जगराओं पुल पर फटे राष्ट्रीय ध्वज का मामला सामने आने के बाद अब यह स्पष्ट हो रहा है कि शहर के कई अन्य स्थानों पर भी तिरंगे की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
यह वही स्थल है जहां शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर की प्रतिमाएं स्थापित हैं—वे महान सपूत, जिनके बलिदान की बदौलत आज देशवासी स्वतंत्रता का अनुभव कर रहे हैं। ऐसे में, उनके सम्मान से जुड़े राष्ट्रीय ध्वज की अनदेखी कई सवाल खड़े करती है।
स्थानीय नागरिकों में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि “जिन शहीदों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, यदि उनके सम्मान में लगाए गए ध्वजों की ही देखरेख नहीं होगी, तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
शहर में कई स्थानों पर ध्वज बदहाल
सूत्रों के अनुसार, शहर के विभिन्न चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे राष्ट्रीय ध्वज समय के साथ क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कहीं ध्वज फट चुके हैं, तो कहीं उनके रंग फीके पड़ गए हैं। इसके बावजूद, संबंधित विभागों की ओर से नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था दिखाई नहीं देती।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे प्रश्न
इस मामले में लुधियाना नगर निगम, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारी तथा जिला प्रशासन की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि केवल ध्वज स्थापित करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसकी गरिमा बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ध्वज संहिता का उल्लंघन
विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति भारतीय ध्वज संहिता के प्रावधानों के विपरीत है। संहिता के तहत राष्ट्रीय ध्वज को हमेशा सम्मानजनक स्थिति में फहराना अनिवार्य है और क्षतिग्रस्त होने पर उसे तुरंत बदला जाना चाहिए।
जनता की मांग
शहरवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी सार्वजनिक स्थलों पर लगे राष्ट्रीय ध्वजों का तत्काल सर्वे कराया जाए, क्षतिग्रस्त ध्वजों को बदला जाए और नियमित निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।