भीषण गर्मी में जनगणना बनी जानलेवा! गर्मी में ड्यूटी करते शिक्षक को पड़ा पैरालिसिस

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 21 May, 2026 05:43 PM

ludhiana census duty turns deadly amidst scorching heat

आसमान से बरसती आग और जानलेवा लू के बीच फील्ड में उतरकर जनगणना का काम कर रहे एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक के लकवे (पैरालिसिस) की चपेट में आने का एक मामला सामने आया है। इस खौफनाक हादसे के बाद से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक यूनियनों में प्रशासन...

लुधियाना (राज): आसमान से बरसती आग और जानलेवा लू के बीच फील्ड में उतरकर जनगणना का काम कर रहे एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक के लकवे (पैरालिसिस) की चपेट में आने का एक मामला सामने आया है। इस खौफनाक हादसे के बाद से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक यूनियनों में प्रशासन की लचर व्यवस्था व संवेदनहीनता को लेकर भारी गुस्सा फूट पड़ा है। अध्यापकों का सीधा आरोप है कि तपती धूप में महिला स्टाफ सहित शिक्षकों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है, जिनकी सुरक्षा के लिए धरातल पर न तो कोई हेल्पलाइन थी और न ही वक्त पर कोई डॉक्टरी मदद मिल सकी।

प्राप्त विवरण के मुताबिक, इंद्रापुरी स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में तैनात शिक्षक राम सिंह सुबह करीब साढ़े आठ बजे भामियां कलां इलाके में तपती धूप के बीच मकानों की गिनती का काम संभाल रहे थे। इसी दौरान अचानक उनके सिर में भयंकर दर्द हुआ और वे बेसुध होकर सड़क के किनारे गिर पड़े। मूल रूप से मोगा के रहने वाले राम सिंह इन दिनों लुधियाना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। सहकर्मी शिक्षक पासी सिंह ने बताया कि शुरुआत में वहां से गुजर रहे राहगीरों को लगा कि वे वैसे ही बेहोश पड़े हैं, लेकिन तभी वहां से गुजर रहे एक स्थानीय बच्चे की नजर उन पर पड़ी और उसने पहचान कर पास में ही रहने वाले एक अन्य अध्यापक को इसकी सूचना दी।

इसके तुरंत बाद जनगणना के सुपरवाइजर और उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई, मगर प्रशासन की ओर से मौके पर कोई भी फौरी इमदाद या एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। पासी सिंह ने बताया कि स्कूल प्रबंधन से खबर मिलते ही जब वे खुद मौके पर पहुंचे, तो राम सिंह की हालत अत्यंत नाजुक हो चुकी थी, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अपनी गाड़ियों से अस्पताल ले जाया गया। पीड़ित के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए कि राम सिंह ने खुद तबीयत बिगड़ने पर जनगणना प्रभारी से गुहार लगाई थी, परंतु प्रशासन उन्हें एक  सरकारी एंबुलेंस तक मुहैया कराने में नाकाम रहा। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल साठ हजार रुपये का एक विशेष इंजेक्शन लगाने की बात कही, लेकिन  स्थिति बिगड़ती देख उन्हें फरीदकोट के अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां फिलहाल उनकी जुबान बंद हो चुकी है और वे जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा रोष जताते हुए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के महासचिव रूपिंदर सिंह गिल ने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच महिला स्टाफ सहित तमाम शिक्षकों को उनके गृह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजकर जबरन ड्यूटियां ली जा रही हैं। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि फील्ड में काम कर रहे कर्मियों के लिए न तो कोई सहायता केंद्र है, न कोई इमरजेंसी मेडिकल किट और न ही अधिकारियों के बीच कोई आपसी तालमेल, जिसके कारण आज एक शिक्षक जिंदगी भर के लिए अपाहिज होने की कगार पर पहुंच गया है।
 
अध्यापक के अपाहिज होने के बाद जागी कुंभकर्णी नींद, एडीसी ने दिए कंट्रोल रूम के निर्देश

इस बखेड़े और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटी है। अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी-सह-एडीसी (जनरल) पूनम सिंह ने बुधवार को इस गंभीर मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जनगणना कार्य में जुटे कर्मचारियों की सहूलियत के लिए तत्काल प्रभाव से एक विशेष कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि यह कंट्रोल रूम अब जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों को हरसंभव मार्गदर्शन, तुरंत सहायता और इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट देगा। इसके साथ ही जिले के तमाम एसडीएम को अपने-अपने इलाकों में इस पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी रखने और खुद फील्ड में नजर बनाए रखने की हिदायत दी गई है।

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