अपराध की आग में लुधियाना: हत्या के मामलों में देश में दूसरे नंबर पर पहुंचा औद्योगिक शहर

Edited By Vatika,Updated: 15 May, 2026 01:57 PM

ludhiana crime hub

पंजाब का औद्योगिक गढ़ माना जाने वाला लुधियाना अब अपराध की दलदल में फंसता नजर आ रहा है

लुधियाना (राज): पंजाब का औद्योगिक गढ़ माना जाने वाला लुधियाना अब अपराध की दलदल में फंसता नजर आ रहा है। सड़क हादसों में खराब रिकॉर्ड के बाद अब नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने शहरवासियों और पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना देश के उन चुनिंदा शहरों की सूची में शुमार हो गया है, जहां हत्या जैसी संगीन वारदातें सबसे ज्यादा हो रही हैं।

फरीदाबाद नंबर वन, लुधियाना और आसनसोल दूसरे स्थान पर
NCRB द्वारा देश के 34 बड़े शहरों के अपराध आंकड़ों के विश्लेषण में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। साल 2024 में लुधियाना में हत्या के कुल 56 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 58 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन मृतकों में 44 पुरुष और 14 महिलाएं शामिल हैं। आंकड़ों की दौड़ में लुधियाना देशभर में दूसरे पायदान पर रहा है। इस फेहरिस्त में हरियाणा का फरीदाबाद 79 मामलों के साथ पहले स्थान पर है, जबकि पश्चिम बंगाल का आसनसोल (56 मामले) लुधियाना के साथ संयुक्त रूप से दूसरे और आगरा (53 मामले) तीसरे स्थान पर रहा है।

गंभीर रंजिश नहीं, छोटी-छोटी बातें ले रही हैं जान
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू हत्याओं के पीछे की वजह है। हैरानी की बात यह है कि शहर में सबसे ज्यादा हत्याएं किसी बड़े गैंगवार या बड़ी साजिश के तहत नहीं, बल्कि मामूली विवादों और छोटी-मोटी कहासुनी के चलते हुई हैं। ऐसे कुल 19 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 14 हत्याएं पुरानी रंजिश, 8 अवैध संबंधों और 1 मामला गैंगवार से जुड़ा रहा। वहीं, 6 मामलों में पुलिस अब तक हत्या की वजह का पता नहीं लगा सकी है।

युवा और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर
हिंसक वारदातों का सबसे ज्यादा शिकार 30 से 45 साल के लोग हो रहे हैं। इस आयु वर्ग के 26 लोगों (18 पुरुष और 8 महिलाएं) की हत्या की गई। इसके अलावा 18 से 30 वर्ष के 18 युवाओं और 45 से 60 वर्ष के 12 लोगों को मौत के घाट उतारा गया। एक मामले में 16 से 18 साल की नाबालिग लड़की भी हिंसा का शिकार बनी। पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में यह संख्या 58 थी, जो पिछले दो सालों से 56 पर टिकी हुई है। NCRB की इस रिपोर्ट ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

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