लुधियाना में सबसे बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा, सब्जी बेचने वाला निकला मास्टरमाइंड

Edited By Kamini,Updated: 18 May, 2026 02:23 PM

biggest cyber  fraud exposed in ludhiana

पंजाब के लुधियाना में सामने आए करोड़ों रुपए के साइबर फ्रॉड मामले ने पूरे शहर को हैरान कर दिया है।

लुधियाना (गणेश/सचिन): पंजाब के लुधियाना में सामने आए करोड़ों रुपए के साइबर फ्रॉड मामले ने पूरे शहर को हैरान कर दिया है। जिस युवक को लोग रोज मंडी और दुकान पर सब्जी बेचते देखते थे, वही विदेशों में बैठे लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाने वाले बड़े नेटवर्क का मास्टरमाइंड निकला। पुलिस ने आरोपी की पहचान मुनीश के रूप में की है, जो बाहर से बेहद साधारण जीवन जीता दिखाई देता था। लुधियाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई में अब तक 140 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य लोगों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और करोड़ों रुपए की ठगी को अंजाम दे चुका है।

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दिन में दुकान, रात को साइबर फ्रॉड का खेल

स्थानीय लोगों के मुताबिक मुनीश रोज सुबह परिवार की सब्जी दुकान पर बैठता था। इलाके में उसकी पहचान एक मेहनती युवक के रूप में थी। दुकान पर आने-जाने वाले लोगों को कभी अंदाजा तक नहीं हुआ कि वही युवक रात के समय इंटरनेशनल साइबर गैंग को ऑपरेट करता है। बताया जा रहा है कि आरोपी का परिवार कई सालों से सब्जी बेचने का काम कर रहा है। परिवार की दुकान करीब 50 साल पुरानी बताई जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि मुनीश ने इसी साधारण पहचान को अपनी सबसे बड़ी ढाल बना रखा था।

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पुलिस को मिली थी गुप्त सूचना

लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में कुछ फर्जी कॉल सेंटर चल रहे हैं, जहां से विदेशी नागरिकों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। सूचना के बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की और फिर शहर के कई कमर्शियल परिसरों में एक साथ रेड की गई। रेड के दौरान दर्जनों युवक-युवतियां कंप्यूटर सिस्टम पर काम करते मिले। मौके से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और विदेशी नागरिकों का डेटा बरामद किया गया।

आरोपी बेहद शातिर और प्रोफेशनल तरीके से कर रहे थे काम 

पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि आरोपी लोगों के कंप्यूटर पर फर्जी वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के नाम का इस्तेमाल किया जाता था ताकि लोग आसानी से भरोसा कर लें। उन्होंने बताया कि आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बताकर लोगों से बातचीत करते थे और फिर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर उनके सिस्टम का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते थे। कमिश्नर के मुताबिक आरोपियों की अंग्रेजी और बातचीत का तरीका इतना प्रोफेशनल था कि विदेशी लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।

करोड़ों की नकदी और लग्जरी गाड़ियां बरामद

पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद राशि, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और कई लग्जरी गाड़ियां बरामद की हैं। इसके अलावा सैकड़ों बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं। जांच एजेंसियों ने कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है ताकि आगे पैसों के लेन-देन को रोका जा सके। पुलिस का मानना है कि नेटवर्क के जरिए विदेशों से करोड़ों रुपए भारत लाए गए।

ऐसे फंसाए जाते थे विदेशी नागरिक

जांच में सामने आया कि आरोपी विदेशी लोगों के कंप्यूटर स्क्रीन पर नकली वायरस और सिक्योरिटी अलर्ट भेजते थे। डर के कारण लोग स्क्रीन पर दिख रहे नंबर पर कॉल कर देते थे। इसके बाद आरोपी खुद को टेक्निकल सपोर्ट स्टाफ बताकर AnyDesk और UltraViewer जैसे ऐप डाउनलोड करवाते थे। जैसे ही ऐप इंस्टॉल होती थी, आरोपी सिस्टम का पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते थे। फिर बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और निजी डेटा हासिल कर लोगों से पैसे ठग लिए जाते थे।

डर दिखाकर लोगों से वसूले जाते थे डॉलर

पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों को यह कहकर डराते थे कि उनके सिस्टम में गैरकानूनी कंटेंट मिला है या उनका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है। घबराए हुए लोग तुरंत पैसे ट्रांसफर कर देते थे। कई बार लोगों से हजारों डॉलर तक वसूले गए। पुलिस का कहना है कि नेटवर्क मानसिक दबाव बनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था।

प्रोफेशनल कंपनी की तरह चलता था नेटवर्क

पुलिस जांच में पता चला कि पूरे नेटवर्क को कॉल सेंटर की तरह ऑपरेट किया जा रहा था। “ऑपनर टीम” लोगों को जाल में फंसाती थी, जबकि “क्लोजर टीम” पैसों का ट्रांसफर करवाती थी। अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई थी। हर टीम में कई युवक-युवतियां शामिल थे और उन्हें अच्छी सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता था। सूत्रों के मुताबिक गरीब परिवारों के युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल किया जाता था।

हवाला और क्रिप्टो लिंक की जांच जारी

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि ठगी से कमाया गया पैसा कहां-कहां भेजा गया। शुरुआती जांच में हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की बात सामने आई है। पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

लोगों से पुलिस की अपील

लुधियाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान टेक्निकल सपोर्ट कॉल या लिंक पर भरोसा न करें। किसी को भी मोबाइल या कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस न दें। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधी अब बेहद आधुनिक तरीके अपना रहे हैं, इसलिए हर व्यक्ति को सतर्क रहने की जरूरत है।

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