पूर्व विधायक पिंकी द्वारा कारोबारी वी.पी. सिंह और करणपाल पर दर्ज केस के मामले में हुआ अहम खुलासा

Edited By Kalash,Updated: 29 May, 2022 10:53 AM

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पंजाब की सत्ता में रही कांग्रेस के विधायकों ने अपनी सियासी दुश्मनी निकालने के लिए झूठे मुकद्दमे दर्ज

जालंधर (ब्यूरो): पंजाब की सत्ता में रही कांग्रेस के विधायकों ने अपनी सियासी दुश्मनी निकालने के लिए झूठे मुकद्दमे दर्ज करवाने और लोगों को बेइज्जत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला फिरोजपुर के थाना कुलगढ़ी का है जिसमें नामजद किया गया युवक करणपाल सिंह मुकद्दमे में दिखाई गई घटना के समय भारत में नहीं बल्कि पैरिस में था और इस मुकद्दमे की शिकायतकर्ता महिला ने अदालत में पेश होकर बयान दिया है कि करणपाल सिंह, उसके पिता वी.पी. सिंह और उसके साथियों के खिलाफ कांग्रेस के उस समय के विधायक परमिंदर सिंह पिंकी और उसके साले बिट्टू सांघा के दबाव में झूठा मुकद्दमा दर्ज करवाया गया था।

फिरोजपुर अर्बन विधानसभा हलके के थाना कुलगढ़ी की पुलिस ने किंदर कौर पत्नी शिंदर सिंह वासी खूह मोहर सिंह वाला (सैदे के) के बयानों पर 5 दिसम्बर 2020 को मुकद्दमा नंबर 179 दर्ज किया था जिसमें वरिंदर पाल सिंह उर्फ वी.पी. सिंह पुत्र अमरीक सिंह, करणपाल पुत्र वरिंदर पाल सिंह, बलजिंदर सिंह बेदी और सुशील कुमार उर्फ शीला को नामजद करते हुए उन पर धारा 420,506,465,468,471,34 और 120 तथा एस.सी./एस.टी. एक्ट 1989 लगाई थी। 

महिला ने वरिंदरपाल सिंह और करणपाल पर फिरोजपुर से हवाला रैकेट चलाने, गैर कानूनी धंधों में शामिल होने, रेलवे विभाग में भर्ती करवाने का झांसा देकर पैसे इकट्ठा करने, जाली कार्ड जारी करके धोखाधड़ी करने और जातिसूचक गालियां देने आदि के गंभीर आरोप लगाए थे और कहा था कि वरिंद्रपाल और करणपाल ने रेलवे में नौकरी दिलवाने का झांसा देकर उससे 18 लाख रुपए लिए थे। 

पैसे देने के बाद जब उसके पति को नौकरी नहीं मिली तो पैसे मांगने पर वी.पी. सिंह और करणपाल ने उसकी बेइज्जती की और जातिसूचक गालियां निकालते हुए उसकी जाति का मजाक उड़ाया तथा उसे जान से मारने की धमकियां दीं। इस मुकद्दमे की जांच करने के लिए एस.एस.पी. फिरोजपुर की ओर से एस.पी. के नेतृत्व में एक सिट गठित की गई थी। सिट के चेयरमैन एस.पी. गुरमीत सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महिला के सभी आरोप झूठे हैं और जिस दिन की घटना का उल्लेख किया गया है उस दिन करणपाल हिंदुस्तान में नहीं बल्कि पैरिस में था। 
सिट ने वी.पी. सिंह के घर में लगे सी.सी.टी.वी. कैमरों की फुटेज भी जांची। जांच में शिकायतकर्ता महिला और इस केस में नामजद गवाहों का वी.पी. सिंह के घर में आना नहीं पाया गया और न ही उनकी लोकेशनें यहां की हैं। 

सिट रिपोर्ट के अनुसार इस मुकद्दमे में जिन्हें मौके का गवाह बनाया गया है, उनमें से एक इकबाल सिंह पुत्र हरनाम सिंह गांव गेंधड़ का कांग्रेसी सरपंच है और दूसरा रूपिंदर सिंह पुत्र गुरदयाल सिंह एन.यू.एस.आई. का जिला प्रधान है जिनकी घटना वाली जगह पर कोई लोकेशन नहीं पाई गई। किंदर कौर ने एडीशनल जिला एवं सैशन जज सचिन शर्मा की कोर्ट में 8 फरवरी, 2022 को पेश होकर कहा कि सिट ने जांच के बाद जो रिपोर्ट यह मुकद्दमा खारिज करने संबंधी दी है, उससे वह सहमत है और उसे मुकद्दमा खारिज होने से कोई एतराज नहीं है। इस प्रकार सिट और अदालत ने पंजाब के नामी कारोबारी वी.पी. सिंह और करणपाल सिंह और अन्य को मुकद्दमा नंबर 179 में निर्दोष पाया।

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