Edited By Vatika,Updated: 21 Apr, 2026 03:26 PM

साइबर अपराधियों ने ठगी की दुनिया में अब तक के सबसे बड़े कारनामे को अंजाम देते हुए लुधियाना
लुधियाना/मोहाली (राज): साइबर अपराधियों ने ठगी की दुनिया में अब तक के सबसे बड़े कारनामे को अंजाम देते हुए लुधियाना के एक बुजुर्ग को अपना शिकार बनाया है।
पंजाब के इतिहास सबसे बड़ी ठगी
'पिग बुचरिंग' तकनीक का इस्तेमाल कर शातिर ठगों ने सीनियर सिटीजन जगदीप सिंघल की उम्र भर की कमाई पर डाका डालते हुए करीब 20 करोड़ रुपए डकार लिए। इसे पंजाब के इतिहास में किसी एक व्यक्ति के साथ हुई अब तक की सबसे बड़ी डिजिटल ठगी माना जा रहा है। ठगों ने न केवल बुजुर्ग को कंगाल किया, बल्कि टेरर फंडिंग और फर्जी आरबीआई नोटिस का डर दिखाकर उन्हें मानसिक तौर पर भी प्रताड़ित किया। ठगी का यह मायाजाल मई 2025 में फेसबुक पर 'अनामिका रॉय' नाम की एक महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू हुआ। फेसबुक पर हुई यह साधारण सी दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई और ठग महिला ने पीड़ित का अटूट विश्वास जीत लिया।
रातों-रात अमीर बनने का दिखाया सपना
जब भरोसा कायम हो गया, तो 'क्रिप्टो क्वीन' ने बुजुर्ग को क्रिप्टो ट्रेडिंग के जरिए रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाना शुरू कर दिया। ठगों ने पीड़ित को क्वाइनएक्स-वीआईपी 2 नाम की एक ऐसी फर्जी वेबसाइट पर ई-वॉलेट बनाने के लिए प्रेरित किया, जो हूबहू किसी अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जैसी दिखती थी। बुजुर्ग को लगा कि वे निवेश कर रहे हैं, जबकि हकीकत में वे अपनी जमापूंजी ठगों के हवाले कर रहे थे।हैरान करने वाली बात यह है कि ठगों ने पीड़ित को फंसाने के लिए 'रिलेशन बिल्डिंग' का सहारा लिया। वेबसाइट पर एक फर्जी बैलेंस शीट दिखाई जाती थी, जिसमें बुजुर्ग का मुनाफा करोड़ों में बढ़ता हुआ नजर आता था। इस विजुअल ट्रिक ने पीड़ित को ऐसा झांसा दिया कि उन्होंने एक के बाद एक 15 बैंकों के 76 खातों में पैसे ट्रांसफर कर दिए।
पीड़ित जगदीप ने दी DGP को शिकायत
जब बुजुर्ग ने अपना मुनाफा निकालना चाहा, तो ठगों ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। सिस्टम में एरर और पेंडिंग स्टेटस दिखाकर नए-नए चार्ज मांगे गए और अंत में टेरर फंडिंग का खौफ दिखाकर उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया गया। पीड़ित जगदीप ने फिर DGP को इसकी शिकायत दी। जोकि इस मामले की जांच मोहाली साइबर सेल की टीम ने की, तब मोहाली पुलिस की जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि ठगों ने इस पूरी रकम को घुमाने के लिए 76 'म्यूल अकाउंट्स' का इस्तेमाल किया।
प्रोफेशनल तरीके से मारी गई ठगी
इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग शहरों में शिफ्ट कर दिया गया ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। साइबर एक्सपर्ट्स इसे ठगी का प्रोफेशनल तरीका मान रहे हैं जिसमें पहले शिकार को 'खिलाया-पिलाया' जाता है (भरोसा जीता जाता है) और फिर एक झटके में 'हलाल' कर दिया जाता है। फिलहाल मोहाली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बैंकों के साथ मिलकर ट्रांजेक्शन ट्रेल खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अजनबियों के साथ वित्तीय जानकारी साझा करना जानलेवा साबित हो सकता है।