लुधियाना के गुरु टॉयज के नाम पर देशभर में साइबर ठगी का जाल! पूरा मामला कर देगा हैरान

Edited By Kalash,Updated: 04 Jun, 2026 01:16 PM

ludhiana businessman fraud case

लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित प्रसिद्ध खिलौना विक्रेता गुरु टॉयज के नाम और पहचान का कथित तौर पर दुरुपयोग कर देशभर में बड़े स्तर पर साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है।

लुधियाना (गणेश/सचिन): लुधियाना के मॉडल टाउन स्थित प्रसिद्ध खिलौना विक्रेता गुरु टॉयज के नाम और पहचान का कथित तौर पर दुरुपयोग कर देशभर में बड़े स्तर पर साइबर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। दुकान संचालक का आरोप है कि पिछले लगभग चार वर्षों से संगठित साइबर गिरोह उसकी दुकान के नाम, सोशल मीडिया सामग्री, तस्वीरों और कारोबारी पहचान का इस्तेमाल कर हजारों लोगों को ठगी का शिकार बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायतें और सबूत सौंपे जाने के बावजूद अब तक इस पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

दुकानदार का दावा है कि इस अवधि के दौरान पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों से 2000 से अधिक पीड़ित उसकी दुकान तक पहुंच चुके हैं। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने हजारों से लेकर लाखों रुपये तक गंवाए हैं। पीड़ितों की बढ़ती संख्या और वर्षों से जारी कथित फर्जीवाड़े ने पुलिस तथा साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया बना ठगी का सबसे बड़ा हथियार 

जानकारी के अनुसार साइबर ठग सबसे पहले गुरु टॉयज के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो, तस्वीरें और प्रचार सामग्री कॉपी करते हैं। इसके बाद फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म पर हूबहू दिखने वाले फर्जी अकाउंट और पेज तैयार किए जाते हैं। इन पेजों को देखकर आम व्यक्ति के लिए असली और नकली अकाउंट में अंतर कर पाना लगभग असंभव हो जाता है। आरोप है कि इन फर्जी पेजों पर 40 से 50 प्रतिशत तक छूट के आकर्षक विज्ञापन चलाए जाते हैं। सस्ते दाम देखकर ग्राहक संपर्क करते हैं और फिर व्हाट्सएप कॉल, चैट तथा मोबाइल नंबरों के माध्यम से उन्हें विश्वास दिलाया जाता है कि वे सीधे गुरु टॉयज के अधिकृत प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे हैं।

नकली आईडी, दस्तावेज और दुकान की तस्वीरों से जीता जाता है भरोसा  

दुकानदार का कहना है कि गिरोह केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए कथित तौर पर नकली आईडी कार्ड, फर्जी दस्तावेज और अन्य प्रमाण भी तैयार किए गए हैं। ग्राहकों को दुकान की वास्तविक तस्वीरें, वीडियो और लोकेशन भेजकर यह विश्वास दिलाया जाता है कि लेन-देन पूरी तरह सुरक्षित है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग बिना किसी संदेह के ऑनलाइन भुगतान कर देते हैं और बाद में ठगी का शिकार बन जाते हैं।

एडवांस पेमेंट के बाद बंद हो जाते हैं नंबर 

पीड़ितों से गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और बैंक खातों के माध्यम से भुगतान लिया जाता है। भुगतान के बाद कुछ समय तक ऑर्डर भेजने का भरोसा दिया जाता है, लेकिन बाद में स्टॉक की कमी, ट्रांसपोर्ट समस्या या तकनीकी कारणों का हवाला देकर डिलीवरी टाली जाती रहती है। अंततः मोबाइल नंबर बंद कर दिए जाते हैं या संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया जाता है।

असली दुकान पहुंचकर खुलता है पूरा सच 

जब पीड़ितों को न सामान मिलता है और न ही पैसा वापस, तब वे मॉडल टाउन स्थित वास्तविक गुरु टॉयज स्टोर पहुंचते हैं। वहां उन्हें पता चलता है कि जिस व्यक्ति को उन्होंने भुगतान किया था उसका दुकान से कोई संबंध ही नहीं है। दुकानदार के अनुसार कई बार लोग गुस्से में दुकान पर पहुंचकर जवाब मांगते हैं और उन्हें पूरी सच्चाई समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

1800 से अधिक मोबाइल नंबरों का रिकॉर्ड, फिर भी नहीं टूटा नेटवर्क 

दुकान संचालक का दावा है कि पिछले चार वर्षों के दौरान उसने ठगी से जुड़े लगभग 1800 संदिग्ध मोबाइल नंबरों का रिकॉर्ड एकत्रित किया है। इसके अलावा अनेक बैंक खातों, सोशल मीडिया प्रोफाइल्स, स्क्रीनशॉट्स और अन्य तकनीकी जानकारियां भी संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। दुकानदार का आरोप है कि इतने बड़े स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद यदि गिरोह लगातार सक्रिय है तो यह जांच और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पुलिस और साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल 

दुकानदार ने आरोप लगाया कि उसने कई बार पुलिस अधिकारियों, साइबर सेल और संबंधित विभागों से संपर्क कर लिखित शिकायतें दीं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया। उनका कहना है कि यदि चार वर्षों में भी हजारों लोगों को ठगने वाले नेटवर्क तक एजेंसियां नहीं पहुंच पाईं तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब मोबाइल नंबर, बैंक खाते, सोशल मीडिया लिंक और अन्य तकनीकी सबूत उपलब्ध कराए जा चुके हैं, तब भी आरोपियों तक पहुंचने में इतनी देरी क्यों हो रही है? उनका कहना है कि हर दिन नए लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं और इसका खामियाजा उनकी प्रतिष्ठा को भुगतना पड़ रहा है।

परिवार भी हुआ प्रभावित

दुकानदार के अनुसार साइबर अपराधियों ने उनके परिवार की तस्वीरों और निजी पहचान का भी कथित तौर पर दुरुपयोग किया है। सोशल मीडिया पर परिवार के सदस्यों की तस्वीरें लगाकर लोगों को गुमराह किया गया, जिससे परिवार को मानसिक तनाव और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

2027 तक समाधान नहीं हुआ तो उठाऊंगा बड़ा कदम 

लगातार बढ़ती परेशानी और वर्षों से चल रहे संघर्ष के बीच दुकानदार भावुक नजर आया। उसने कहा कि चार वर्षों से वह अपनी पहचान, प्रतिष्ठा और ग्राहकों का विश्वास बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। यदि वर्ष 2027 तक भी इस पूरे मामले का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो वह बड़ा और कठोर कदम उठाने पर मजबूर हो सकता है।

बढ़ता साइबर अपराध बना राष्ट्रीय चिंता का विषय

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक दुकान या एक कारोबारी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में तेजी से बढ़ रहे संगठित साइबर अपराध का उदाहरण है। अपराधी अब प्रतिष्ठित व्यापारिक संस्थानों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ कारोबारियों की साख भी प्रभावित हो रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हजारों लोगों को प्रभावित करने वाले इस कथित साइबर नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी? और कब तक पीड़ित ग्राहक तथा प्रभावित कारोबारी इस समस्या का बोझ उठाते रहेंगे?

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