Municipal Elections: बरनाला में मेयर चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई, 2027 का दिख रहा ट्रेलर

Edited By Kamini,Updated: 16 May, 2026 04:54 PM

barnala mayoral election raises political temperature

पंजाब की मालवा बेल्ट का दिल कहे जाने वाले बरनाला शहर में इन दिनों एक नया इतिहास लिखा जा रहा है।

बरनाला (विवेक सिंधवानी/रवि): पंजाब की मालवा बेल्ट का दिल कहे जाने वाले बरनाला शहर में इन दिनों एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। नगर काउंसिल से नगर निगम अपग्रेड होने के बाद, बरनाला अपने पहले 'मेयर' को चुनने के लिए पूरी तरह तैयार है। 19 मई को नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ जाएगी, लेकिन इससे पहले ही शहर का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है। 

इस चुनाव को मात्र एक स्थानीय निकाय चुनाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। चूंकि पंजाब विधानसभा चुनावों में महज 6 से 7 महीने का समय शेष रह गया है, इसलिए राजनीतिक विश्लेषक और मुख्य पार्टियां इसे "वार्मअप मैच या सेमीफाइनल" मानकर चल रही हैं। सत्ताधारी दल से लेकर विपक्ष तक, हर कोई इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक रहा है ताकि इस दंगल को जीतकर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की जा सके।

31 से 50 हुए वार्ड: नए परिसीमन ने बिगाड़ा दिग्गजों का गणित

नगर निगम बनने के बाद बरनाला शहर के वार्डों का नए सिरे से परिसीमन किया गया है। पहले जहां शहर में केवल 31 वार्ड हुआ करते थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 50 हो गई है। वार्डों की संख्या बढ़ने और उनकी भौगोलिक सीमाओं में बदलाव होने के कारण कई पुराने और दिग्गज नेताओं के राजनीतिक समीकरण गड़बड़ा गए हैं। नए जुड़ चुके इलाकों और मतदाताओं को साधने के लिए प्रत्याशियों को नए सिरे से पसीना बहाना पड़ रहा है। इस बार मुकाबला सिर्फ 2 या 3 परंपरागत पार्टियों के बीच नहीं है, बल्कि हर वार्ड में कड़ा त्रिकोणीय या चौकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। 

स्थानीय चेहरे बनाम पार्टी सिंबल: 

क्या वाकई यह वार्मअप मैच है? इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसे विधानसभा का 'वार्मअप मैच' माना जाए या नहीं, इस पर खुद राजनीतिक पंडितों और आम जनता में दो फाड़ हैं।

एक धड़े का मानना है- यह हवा का रुख तय करेगा:

इस विचार के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे ये चुनाव पंजाब की भावी राजनीति का मिजाज तय करेंगे। जो भी पार्टी नगर निगम में अपना बहुमत साबित करके पहला मेयर बनाएगी, उसका कैडर मजबूत होगा और जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि मुख्य चुनाव में भी उसी का पलड़ा भारी है।

दूसरा धड़ा कहता है-स्थानीय गलियों की सियासत अलग है: 

इसके विपरीत, एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इसे वार्मअप मैच मानने से इनकार करता है। उनका तर्क है कि नगर निगम के चुनावों में जनता पार्टी के सिंबल या विचारधारा को देखकर नहीं, बल्कि उम्मीदवार के 'चेहरे' और उसकी स्थानीय उपलब्धता को देखकर वोट देती है। लोग सोचते हैं कि आधी रात को नाली, सड़क या पानी की समस्या होने पर स्थानीय पार्षद ही काम आएगा, चंडीगढ़ बैठे नेता नहीं।

'निर्दलीय' बिगाड़ रहे हैं खेल: किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं आजाद प्रत्याशी

बरनाला के इस महामुकाबले में इस बार 'आजाद' (निर्दलीय) प्रत्याशियों की बाढ़ आई हुई है। शहर के चौक-चौराहों पर चल रही चर्चाओं की मानें तो कई वार्डों में आजाद उम्मीदवार मुख्य पार्टियों के आधिकारिक प्रत्याशियों पर भारी पड़ रहे हैं। टिकट कटने से नाराज होकर बगावत करने वाले नेताओं और अपने दम पर समाज सेवा करने वाले चेहरों ने इस चुनाव को बेहद पेचीदा बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि यदि किसी भी मुख्य दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो ये आजाद प्रत्याशी 'किंगमेकर' की भूमिका निभाएंगे और बरनाला के पहले मेयर की चाबी इन्हीं निर्दलीयों के हाथ में होगी।

मुख्य मुद्दे: विकास, सफाई और नए निगम का टैक्स ढांचा

चुनाव प्रचार में जहां पार्टियां एक-दूसरे पर राजनीतिक तीर चला रही हैं, वहीं बरनाला की जनता के अपने बुनियादी मुद्दे हैं। नगर निगम बनने के बाद लोगों को उम्मीद है कि शहर को बेहतर बुनियादी ढांचा, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और साफ-सुथरी सड़कें मिलेंगी। हालांकि, इसके साथ ही जनता के मन में यह डर भी है कि निगम बनने के बाद उन पर नए टैक्स (Property Tax व अन्य शुल्क) का बोझ बढ़ सकता है। प्रत्याशी इस समय जनता को विकास का भरोसा दिलाने और टैक्स के डर को दूर करने में लगे हैं।

19 मई के बाद साफ होगी धुंध

फिलहाल सभी प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिए हैं और डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू कर दिया है। लेकिन असली चुनावी तस्वीर 19 मई की शाम को साफ होगी, जब नामांकन वापस लेने की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन मैदान में डटा रहता है और कौन अपनी पार्टी या साथियों के पक्ष में पीछे हटता है। बरनाला की जनता इस समय बेहद खामोश और रोमांचित है। वह बखूबी जानती है कि उसका एक वोट शहर को न केवल पहला मेयर देगा, बल्कि पंजाब की भावी राजनीति की दिशा और दशा भी तय करेगा।

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