बरनाला में सियासी उबाल, FIR रद्द कराने के लिए कांग्रेस MLA ने किया अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का ऐलान

Edited By Kamini,Updated: 04 May, 2026 05:14 PM

congress mla announces hunger strike to quash fir

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बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि): बरनाला की राजनीति में इस वक्त जबरदस्त गर्माहट पैदा हो गई है। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं पर दर्ज की गई FIR को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने पंजाब सरकार के खिलाफ सीधे संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है। जिला प्रधान और विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि वे 6 मई (बुधवार) से अपने सैकड़ों साथियों के साथ एसएसपी दफ्तर के बाहर भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

प्रेस वार्ता के दौरान विधायक काला ढिल्लों ने कहा कि 14 मार्च को कांग्रेस द्वारा महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह देने के सरकारी वादे के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया था। लेकिन पुलिस ने सत्ताधारियों के इशारे पर बदले की भावना से 20 वरिष्ठ नेताओं और कई अज्ञात कार्यकर्ताओं पर झूठा मामला दर्ज कर लिया। ढिल्लों ने कहा, "हमने पुलिस को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने साबित कर दिया है कि वे सत्ता के दबाव में हैं।"

विधायक ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि हालिया सर्वे में बरनाला जिले के तीनों हलकों में 'आप' की करारी हार की रिपोर्ट सामने आई है। इसी बौखलाहट में कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए झूठे मुकदमों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पुलिस ने महिला कांग्रेस नेताओं को भी इस केस में घसीटा है, जो राजनीति का सबसे निचला स्तर है।

अफसरों को चेतावनी: "हाथों से दी गांठें मुंह से खोलनी पड़ेंगी"

विधायक काला ढिल्लों ने उन पुलिस अधिकारियों को भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी जो "सत्ता की कठपुतली" बने हुए हैं। उन्होंने मुहावरे के अंदाज में कहा कि आज जो पुलिस अफसर राजनीतिक दबाव में 'गांठें' बांध रहे हैं, समय आने पर उन्हें ये गांठें मुंह से खोलनी पड़ेंगी और कई बार गांठें इतनी पक्की हो जाती हैं कि मुंह से भी नहीं खुलतीं। कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक FIR रद्द नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। विधायक ने कहा, "कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए मैं अपनी जान की भी परवाह नहीं करूंगा।

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एफआईआर रद कराने की मांग के पीछे छिपा है बरनाला का सियासी वर्चस्व

बरनाला की सियासत अब केवल प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए बिछाई जा रही बिसात का हिस्सा बन गई है। जिला कांग्रेस प्रधान और विधायक कुलदीप सिंह काला ढिल्लों द्वारा 6 मई से घोषित 'भूख हड़ताल' महज एक FIR का विरोध नहीं, बल्कि सत्ताधारी 'आप' सरकार को उनके गढ़ में घेरने की एक सोची-समझी रणनीति है। विधायक काला ढिल्लों ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि पंजाब सरकार के अपने आंतरिक सर्वे में बरनाला जिले की तीनों सीटों पर आम आदमी पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर पाई गई है। ढिल्लों के अनुसार, इसी राजनीतिक जमीन के खिसकने के डर से स्थानीय सत्ताधारी नेताओं ने पुलिस का सहारा लेकर कांग्रेसियों पर मुकदमे दर्ज करवाए हैं। उन्होंने कहा, "यह एफआईआर हमारी लोकप्रियता से डर का परिणाम है, ताकि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा सके।"

महिलाओं का मुद्दा और सियासी माइलेज

कांग्रेस ने बड़ी चतुराई से इस संघर्ष को महिलाओं के सम्मान से जोड़ दिया है। 1000 रुपये प्रति माह के वादे को ढाल बनाकर और FIR में महिला नेताओं के नाम शामिल होने को मुद्दा बनाकर, काला ढिल्लों एक बड़ा वोट बैंक साधने की कोशिश में हैं। 6 मई से होने वाली भूख हड़ताल बरनाला में कांग्रेस के लिए एक 'लिटमस टेस्ट' की तरह होगी, जो यह तय करेगी कि पार्टी आगामी चुनावों के लिए कितनी लामबंद है।

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