जुगाड़ू रिक्शा में स्कूल जा रहे बच्चों के साथ हादसा, मची चीख-पुकार, सरकार बेखबर!

Edited By Urmila,Updated: 21 Apr, 2026 05:26 PM

accident involving children on their way to school

आज सुबह सतलुज नदी के किनारे रहने वाले गांव माहल घुमाना के प्रवासी मजदूरों के बच्चे जुगाड़ू रिक्शा में बैठकर पास के गांव भूपाना के सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहे थे, तभी रास्ते में हादसा हो गया।

माछीवाड़ा साहिब (टक्कर) : आज सुबह सतलुज नदी के किनारे रहने वाले गांव माहल घुमाना के प्रवासी मजदूरों के बच्चे जुगाड़ू रिक्शा में बैठकर पास के गांव भूपाना के सरकारी स्कूल में पढ़ने जा रहे थे, तभी रास्ते में हादसा हो गया, जिससे ड्राइवर समेत 10 से ज़्यादा छोटे बच्चे घायल हो गए। जुगाड़ू रिक्शा ड्राइवर महिंदर सिंह ने बताया कि वह रोज़ की तरह सतलुज नदी के धुस्सी किनारे रहने वाले महल घुमाना गांव के प्रवासी मजदूरों के बच्चों को स्कूल छोड़ने जा रहा था। उसने बताया कि रास्ते में उसे एक गाड़ी ने टक्कर मार दी, जिससे उसका रिक्शा खेतों में पलट गया और उसमें सवार 15 बच्चे भी गिर गए। उसने बताया कि घायल बच्चों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उसे भी गंभीर चोटें आई हैं।

प्राइवेट अस्पताल में इन बच्चों का इलाज कर रहे डॉ. प्रकाश शर्मा ने बताया कि उनके पास 6 बच्चे इलाज के लिए आए हैं, जिनके नाम गौरी, रमेश, दिनेश, कृष्ण और नंद हैं। इसके अलावा 3 बच्चों के पैरों की हड्डियां टूट गई हैं और बाकी को चोटें आई हैं। उन्होंने बताया कि 3 और बच्चों को जिन्हें मामूली चोटें आई थीं, उन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। उन्होंने बताया कि गाड़ी चलाने वाले महेंद्र सिंह के पैरों और पीठ पर चोटें आई हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल ने इस घटना की जानकारी पुलिस स्टेशन को भेज दी है।

3 किलोमीटर दूर स्कूल जाने का किराया 300 रुपये

सतलुज नदी के धुस्सी किनारे झुग्गियों में रहने वाले ये गरीब मजदूर अपने बच्चों को घर से 3 किलोमीटर दूर सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं। बच्चों को रोज़ाना 3 किलोमीटर पैदल चलने में बहुत दिक्कत होती है, जिसके कारण माता-पिता ने एक जुगाड़ू रिक्शा किराए पर लिया है जिसका किराया 300 रुपये प्रति महीना है। आज जब यह जुगाड़ू रिक्शा हादसे का शिकार हो गया, तो माता-पिता अपने बच्चों को लेकर बहुत परेशान हो गए। ये गरीब माता-पिता अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल या वैन में भेजने के लिए हर महीने हज़ारों रुपये खर्च नहीं कर पाते, जिसकी वजह से उन्हें अपने बच्चों को बैन जुगाड़ू रिक्शा पर भेजना पड़ता है। सरकारों को इन गरीब बच्चों को पढ़ाने का सही इंतज़ाम करना चाहिए।

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