फाइलों में दबे 300 करोड़: पनबस/PRTC कर्मचारियों की तनख्वाह पर छाए ‘संकट’ के बादल

Edited By Urmila, Updated: 02 May, 2022 03:05 PM

300 crores buried in files clouds of  crisis  over the salary

सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा थी कि पंजाब में फंडों की कमी नहीं आएगी परन्तु अब हालात इस तरह के बने हुए हैं कि अलग-अलग विभागों को सरकार ...

जालंधर (पुनीत): सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी के नेताओं ने कहा थी कि पंजाब में फंडों की कमी नहीं आएगी परन्तु अब हालात इस तरह के बने हुए हैं कि अलग-अलग विभागों को सरकार की तरफ से अदायगी करने में बेहद देरी की जा रही है, जिस कारण अलग-अलग विभागों के जरूरी कामकाज रुके हुए हैं।

ट्रांसपोर्ट विभाग अधीन रोडवेज-पनबस और पी.आर.टी.सी. में काम करने वाले कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए विभाग के पास 
उचित फंड उपलब्ध नहीं हैं जिस कारण कर्मचारियों की तनख्वाह रिलीज होने पर संकट के बादल छाए हुए हैं। पिछले समय दौरान कच्चे कर्मचारियों को तनख्वाह देने के लिए विभाग की तरफ से अपनी एफ.डी. का प्रयोग करके तनख्वाह रिलीज की गई थी।

इस बार तनख्वाह रिलीज करने के लिए कौन-सा जुगाड़ लगाया जाएगा, यह देखने योग्य होगा क्योंकि विभाग की माली हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उधार में पहनाए जा रहे डीजल के बिलों की अदायगी में आ रही मुश्किलों कारण बसों के पहिए रुक सकते हैं। पिछले दिनों दौरान जालंधर के पंप की तरफ से डीजल की सप्लाई रोक दी गई थी जिस कारण बसों की यातायात प्रभावित हुई थी। रोडवेज-पनबस और पी.आर.टी.सी. की तरफ से महिलाओं को जो मुफ्त सफर करवाया जाता है इसका महीनों का बिल बनाकर सरकार को भेजा जाता है और बिल भेजने के 1-2 महीनें में ही भुगतान हो जाता है।

इस बार नवंबर 2021 से भुगतान रुका हुआ है। इस कारण महिलाओं और विद्यार्थियों के मुफ्त सफर और अन्य बिल 300 करोड़ तक पहुंच गए जोकि फाइलों में दबे हुए हैं। इनका भुगतान न होने के कारण विभाग को आर्थिक तंगी उठानी पड़ रही है परन्तु इसका कोई हल होता नजर नहीं आ रहा। आधिकारियों का कहना है कि मतदान कारण बिलों का भुगतान रुकने करके उम्मीद जताई जा रही थी कि सरकार बनने के बाद तुरंत प्रभाव के साथ बिलों का भुगतान हो जाएगा परन्तु सरकार बनी को डेढ़ महीने से अधिक समय हो जाने के बावजूद बिलों का भुगतान न होना सवालों के घेरे में आ रहा है। इसके साथ आम आदमी पार्टी के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है और विभाग को काम चलाना मुश्किल हो रहा है। वहीं सरकारी बसों में ज्यादातर सीटें महिलाओं के साथ भरीं रहती हैं जिस कारण विभाग को नकदी के रूप में होने वाली आमदनी बंद हो चुकी है। आधिकारियों का कहना है कि बिलों का भुगतान न होने के कारण यातायात पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

ट्रांसपोर्ट मंत्री के ध्यान में मामला लाने के बाद भी नहीं निकला हल 
नाम न छापने की सूरत में विभागीय आधिकारियों का कहना है कि ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर की तरफ से प्रभार संभालने के बाद कई बार मीटिंग की जा चुकी है। लगभग हर मीटिंग में महिलाओं के सफर की राशि रिलीज न होने का मुद्दा उठाया जा चुका है परन्तु इसके बावजूद फंड अटके हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार बनने से पहले वह अपने स्तर पर फंड रिलीज करवाने के लिए यत्न करते रहे हैं परन्तु अब सरकार के सत्ता में आने पर मंत्री नियुक्त होने के कारण वह अपने स्तर पर कोई अपरोच नहीं कर रहे। वह विभागीय दिक्कतों बारे मंत्री के ध्यान में मामले को दोबारा लाएंगे जिससे इसका हल हो सके।

मंजूरी के बाद भी 15 करोड़ रुपए नहीं हुए रिलीज
करोड़ों के बिलों में से सरकार की तरफ से अप्रैल के दूसरे सप्ताह में 15 करोड़ रुपए जारी करने की मंजूरी दी गई थी, जोकि ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ डालने वाली कहावत को साबित करती है। उक्त 15 करोड़ रुपए 15 अप्रैल तक जारी होने की उम्मीद थी परन्तु अब 16 दिनों का समय बीत चुका है परन्तु राशि रिलीज नहीं हो सकी। जारी होने वाले 15 करोड़ को भी दो स्थानों पर बांटा जाएगा, इनमें से 7.5 करोड़ रुपए रोडवेज-पनबस्स और बाकी के 7.5 करोड़ रुपए पी.आर.टी.सी. को दिए जाएंगे। उक्त राशि को विभागों के अकाउंट में पहुंचाने में इतना समय लगना ढीली कार्यप्रणाली को जाहिर करता है। 

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