Bhatinda : नगर निगम में विकास को मिलेंगे सिर्फ 43 करोड़, 80% हिस्सा चढ़ेगा कर्मचारियों की भेंट

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 25 Feb, 2026 07:31 PM

bhatinda only rs 43 crore for development in municipal corporation

चार लाख के करीब पहुंच चुकी आबादी वाले बठिंडा शहर के लिए नगर निगम का 208 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट 27 फरवरी को होने वाली सालाना बैठक में पेश किया जाएगा, लेकिन इस बजट की सच्चाई चौंकाने वाली है। कुल बजट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा वेतन, रखरखाव और...

बठिंडा (विजय वर्मा) :  चार लाख के करीब पहुंच चुकी आबादी वाले बठिंडा शहर के लिए नगर निगम का 208 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट 27 फरवरी को होने वाली सालाना बैठक में पेश किया जाएगा, लेकिन इस बजट की सच्चाई चौंकाने वाली है। कुल बजट का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा वेतन, रखरखाव और कर्ज की अदायगी में ही खत्म हो जाएगा, जबकि शहर के विकास के लिए महज 43.45 करोड़ रुपये ही छोड़े गए हैं।

वेतन और रखरखाव में ही निगल जाएगा बजट

प्रस्तावित बजट के अनुसार 119 करोड़ रुपये कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन व भत्तों पर खर्च होंगे, जबकि 67.75 करोड़ रुपये दफ्तरी और अन्य रखरखाव कार्यों पर निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा आकस्मिक खर्चों के लिए 2.10 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस तरह निगम का अधिकांश बजट पहले से तय खर्चों में ही सिमट कर रह जाएगा। विभिन्न परियोजनाओं के लिए लिए गए कर्ज पर निगम को 15.18 करोड़ रुपये ब्याज देना होगा, जबकि निगम पर 43.75 करोड़ रुपये का बकाया ऋण अभी भी बाकी है।

पीआईडीबी और हुडको का कर्ज बना सिरदर्द

नगर निगम ने वर्ष 2008 में पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (पीआईडीबी) से 40 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जबकि ब्लू फाक्स जमीन मामले में 12.45 करोड़ रुपये अग्रिम राशि भी कर्ज के रूप में ली गई। इस तरह पीआईडीबी से कुल 52.45 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया, जिसकी कटौती निगम को मिलने वाली एक्साइज ड्यूटी से की जा रही है। इसके अलावा शत-प्रतिशत जल और सीवर सुविधा परियोजना के लिए हुडको से 105 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था, जिसमें से अब तक 43.75 करोड़ रुपये निगम को मिले हैं। निगम अब तक 41.07 करोड़ रुपये मूलधन और 15.19 करोड़ रुपये ब्याज चुका चुका है।

सीवरेज सुधार सबसे बड़ी चुनौती, लेकिन बजट में ठोस योजना गायब

शहर में लंबे समय से सीवरेज व्यवस्था बदहाल बनी हुई है। बरसात के दिनों में जलभराव आम समस्या है, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई बड़ी और स्पष्ट योजना नजर नहीं आ रही। सवाल यह है कि निगम इतने सीमित संसाधनों में महंगी सीवरेज परियोजना को कैसे अंजाम देगा?

शहर का विस्तार बढ़ाएगा निगम का बोझ

नगर निगम सीमा का लगातार विस्तार हो रहा है। नए क्षेत्रों को निगम सीमा में शामिल करने के बाद वहां सड़क, पानी, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी, जिससे निगम पर वित्तीय दबाव और बढ़ेगा।
 

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