Dollar मंहगा होने से बिगड़ी देश की आर्थिक स्थिति, मुनाफे से अधिक हो रहा नुक्सान

Edited By Kamini,Updated: 16 May, 2022 05:14 PM

the economic condition of the country worsened due to the cost of the dollar

तेजी से बढ़ रही डॉलर की कीमतों के कारण देश की आर्थिक स्थित दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है। आकंड्रों के अनुसार ............

लुधियाना (गौतम) : तेजी से बढ़ रही डॉलर की कीमतों के कारण देश की आर्थिक स्थित दिन प्रतिदिन बिगड़ रही है। आकंड्रों के अनुसार करीब 1 जनवरी को यू.एस.ए. डॉलर का रेट 73.53 रुपए था जबकि 16 मई को 77.75 रुपए था, जो करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी से डॉलर मंहगा होने से आयात- निर्यात में भी अधिक फर्क आने से आर्थिक नुकसान अधिक हो रहा है जबकि मुनाफा कम हो रहा है। निर्यात के मुकाबले आयात 25 प्रतिशत ज्यादा है। आकंड़ों के अनुसार मार्च 2022 में व्यापार घाटा करीब 19 बिलियन था। डॉलर में बढ़ोतरी होने का लाभ केवल एन.आर.आई. के परिवारों को हो रहा है। 

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पैट्रोल, यार्न फैब्ररिकस व कॉटन यार्न के लिए कच्चा माल, लुब्रिकंट्स तेल, आर्यन स्क्रैप, फार्मा प्रोडक्टस, कैमिकल, इलैक्ट्रिकल प्रोडक्टस, कल-पुर्जे इत्यादि का आयात किया जाता है और इनके बदले काफी कम मात्रा में सामान निर्यात किया जाता है। अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर डॉलर की रफ्तार कम न हुई तो देश में मंहगाई बढ़ने के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। आने वाले दिनों मंहगाई रूकने के कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे है। कारण यह है कि डॉलर मंहगा होने से आयात मंहगा हो रहा है और मंहगाई बढ़ रही है। आयात मंहगा होने की वजह से देश में मंहगाई कम नहीं हो सकती। देश में विदेशी मुद्रा भंडार भी दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है तो करीब 590 करोड़ रुपए है। आने वाले समय में विदेशी कर्ज चुकाने की वजह से यह और भी कम हो सकता है। इस समय देश पर 150 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है। आर्थिक स्थिति को देखते हुए जरूरी है कि केन्द्र सरकार की तरफ से इस पर फोक्स किया जाए और विदेश नीति को लेकर मंथन किया जाए ताकि डॉलर की कीमतों पर काबू पाया जा सके । 

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बढ़ोतरी से एन.आर.आई. के परिवारों को फायदा 
डॉलर की कीमतें  बढ़ने से केवल एन.आर.आई. के परिवारों को ही लाभ मिल रहा है। देश के अन्य राज्यों से पंजाब में सबसे अधिक लोग कैनेडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया व अन्य देशों  में है। एक रिपोर्ट के अनुसार केवल पंजाब में ही पिछले 5 महीनों में करीब 1.35 बिलियन डॉलर विदेशों से आए। बढोतरी के हिसाब से इससे इन लोगों को करीब 550 करोड़ का फायदा हुआ, जोकि अलग-अलग सेक्टरों में निवेश हुआ होगा लेकिन वह नाममात्र है, इससे लाभ भी बहुत कम है। जबकि पूरे देश में करीब 86 बिलियन डॉलर एन.आर.आई. अपने परिवारों को भेजते है।

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इस बारे एक्सपोर्टर अशोक कुमार गुप्ता का कहना है कि डालॅर मंहगा होना से बेशक निर्यात में फायदा हो रहा है, लेकिन आयात पर इसका अधिक असर होने से नुकसान है। देश का विदेश मुद्रा भंडारण भी कम हो रहा है। जोकि चिंता का विषय है। आयात पर अधिक असर होने के कारण मंहगाई का ग्राफ भी बढ़ रहा है। मंहगाई के कारण विदेशी आर्डर भी कई बार दूसरे देशों को जा रहे है । केन्द्र सरकार को इस पर कंट्रोल करने के लिए कदम उठाने चाहिए ताकि देश की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। 

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हौजरी एक्सपोर्टर चंदर जैन ने कहा कि कि पहले वैश्विक बीमार और फिर यूक्रेन के युद्ध के कारण ही ऐसे हालात पैदा हो रहे है। देश में आयात अधिक होने की वजह से ही आर्थिक स्थित डांवाडोल हो रही है। यार्न फैबरिक्स, तेल व लुब्रिकेंटस आयॅल के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है जिसकी कीमत मंहगे दामों में चुकानी पड़ रही है। सरकार को इसके लिए विदेश नीतियों में सुधार करना जरूरी है। व्यापार पहले ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है। 

हौजरी एक्सपोर्टर राजेश ढांडा का कहना है कि हौजरी एक्सपोर्टर राजेश ढांडा ने कहा कि बेशक डॉलर की कीमत बढ़ने से निर्यात में फायदा हो रहा है, लेकिन इसके उल्ट आयात अधिक होने के कारण लागतों में वृद्धि हो रही है जिससे देश में महंगाई बढ़ रही है। कारोबारियों की हालत भी इसी वजह से बिगड़ रही है। देश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर वापस लाने के लिए जरूरी है कि केन्द्र सरकार इस पर काबू पाए। समय की जरूरत है कि इम्पोर्ट एक्सपोर्ट की नीतियों पर फोक्स किया जाए। निवेश के कारण व्यापारियों की पूंजी भी फंसी हुई है। आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। लागत बढ़ने से मुनाफा कम हो रहा है। 

नार्दन इंडिया रिजिनल कौंसल मैम्बर सी.एम. दिनेश शर्मा ने कहा कि डॉलर पर काबू पाना अत्यंत जरूरी है क्योंकि डॉलर यूनिर्वसल कंरसी है। डॉलर की कीमत बढ़ने के कारण देश की करंसी के मूल्य में गिरावट होती है जो कि देश के लिए नुकसान है। देश की प्रतिभा को ठेस पहुंचती है। सरकार की तरफ से  इसके लिए फोक्स करना जरूरी है। इससे मंहगाई बेलगाम हो सकती है।  इससे केवल देश में रह रहे एन.आर.आई. लोगों के परिवारों को है, बेशक यह लोग किसी ढंग से बाजार में निवेश भी करते है,लेकिन इससे भी कोई लाभ नहीं हो सकता ।

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