हिमाचल Entry Tax विवाद: टैक्सी यूनियन ने हिमाचल सरकार को शुक्रवार तक का दिया अल्टीमेटम

Edited By Kamini,Updated: 02 Apr, 2026 07:00 PM

taxi union issues ultimatum to himachal government

हिमाचल एंट्री टैक्स से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर विवाद और तेज हो गया है।

अमृतसर (रमन) : हिमाचल एंट्री टैक्स से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर विवाद और तेज हो गया है। पंजाब की विभिन्न यूनियनों ने हिमाचल सरकार को शुक्रवार यानी कि 10 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दे दिया है। यूनियन ने कहा कि, अगर 10 तारीख तक इस फैसलो को वापस नहीं लिया तो पंजाब-हिमाचल बॉर्डर पर जाम करके धरना प्रदर्शन किया जाएगा। 

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आज पूरे पंजाब से आजाद टैक्सी यूनियन के सदस्य अमृतसर में इकट्ठा हुए और हिमाचल सरकार के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार टैक्सी ड्राइवरों पर लगातार “गुंडा टैक्स” लगा रही है, जो पूरी तरह से गलत और अन्यायपूर्ण है। इस मौके पर ड्राइवरों ने नारे लगाए और सरकार के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए। मीडिया से बात करते हुए आजाद टैक्सी यूनियन के प्रेसिडेंट जसबीर सिंह बोपाराय और उनके साथियों ने कहा कि टैक्सी ड्राइवर पहले से ही कई संकटों का सामना कर रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह से ठप हो गया था, जिससे उनकी इनकम का नुकसान हुआ। 

इसके बाद पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और दोनों देशों के बीच तनाव का भी टूरिज्म पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से कई गाड़ियां भी खराब हो गई हैं और अब ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से तेल की कीमतें बढ़ने से डिमांड बढ़ गई है। इसके साथ ही हिमाचल सरकार द्वारा टैक्स में भारी बढ़ोतरी से टैक्सी ड्राइवरों के लिए और भी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। टैक्सी ड्राइवरों का आरोप है कि पहले छोटी गाड़ियों पर टैक्स 30 रुपये था, जिसे पहले बढ़ाकर 70 रुपये किया गया और अब इसे बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा 3 महीने का टैक्स भी काफी बढ़ा दिया गया है। उनका कहना है कि वे पहले से ही पंजाब सरकार और केंद्र सरकार को टैक्स दे रहे हैं, तो हिमाचल में अलग से टैक्स लगाने का क्या नियम है।

ड्राइवरों ने यह भी कहा कि हिमाचल में कई जगहों पर RTO अधिकारी हफ़्ते का किराया वसूलते हैं और कई बार टैक्सी ड्राइवरों के साथ मारपीट भी की जाती है। उन्होंने डलहौजी, धर्मशाला और दूसरे इलाकों में आ रही दिक्कतों का भी जिक्र किया, जहां टैक्सी ड्राइवरों को पैसेंजर लेने से भी रोका जाता है। इसके साथ ही टैक्सी मालिकों ने अपनी फाइनेंशियल हालत को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। ज़्यादातर गाड़ियां लोन पर हैं और किश्तें चुकाना मुश्किल हो गया है। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है और बच्चों की फीस भरने में भी दिक्कत आ रही है। ड्राइवरों ने कहा कि इतना खर्च करने के बाद भी उनके हाथ में कुछ नहीं बचा है। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से अपील की कि वह हिमाचल सरकार से बात करके इस मसले को सुलझाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर 10 तारीख तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे बॉर्डर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि टैक्सी ड्राइवरों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और अगर सरकार ने जल्द ही कोई हल नहीं निकाला तो यह आंदोलन और भी बड़ा रूप ले सकता है।

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