2014 मोसुल नरसंहार मामला: जीवित बचे व्यक्ति को दस साल बाद मिला न्याय

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 30 Mar, 2026 09:13 PM

witness to 2014 mosul massacre given clean chit

वर्ष 2014 के दौरान ईराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) द्वारा अगवा कर मारे गए 39 भारतीयों से जुड़े चर्चित मामले में गुरदासपुर जिले से संबंधित हरजीत मसीह को गुरदासपुर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रणजीत पाल सिंह चीमा की अदालत ने ह्यूमन...

गुरदासपुर  (हरमन) – वर्ष 2014 के दौरान ईराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) द्वारा अगवा कर मारे गए 39 भारतीयों से जुड़े चर्चित मामले में गुरदासपुर जिले से संबंधित हरजीत मसीह को गुरदासपुर की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रणजीत पाल सिंह चीमा की अदालत ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग और इमिग्रेशन एक्ट से जुड़े मामले में बरी कर दिया है।

इस केस की पैरवी कर रहे प्रसिद्ध वकील मनीष कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 में इराक के मोसुल शहर पर इस्लामिक स्टेट के कब्जे के दौरान 39 भारतीय युवकों को बंदी बना लिया गया था, जिनमें से लगभग 29 पंजाब से संबंधित थे। इस घटना ने पूरे देश में चिंता का माहौल पैदा कर दिया था। उस समय की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि 39 भारतीयों की मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई है और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं।

इस दौरान गुरदासपुर जिले के रहने वाले हरजीत मसीह ने दावा किया था कि वह बड़ी मुश्किल से इस्लामिक स्टेट के चंगुल से बचकर निकला है और उसके सामने ही बाकी भारतीयों को गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। केंद्र सरकार द्वारा उसे व्हाइट पासपोर्ट पर भारत वापस लाया गया था। उस समय हरजीत मसीह द्वारा दिया गया आंखों देखा बयान काफी चर्चा में रहा था।

बाद में वर्ष 2018 में मोसुल के पास मिली अस्थियों की डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि लापता हुए 39 भारतीयों की मौत हो चुकी थी, जिससे इस मामले पर चल रही अनिश्चितता समाप्त हो गई थी।

इस मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब मोसुल में मारे गए गुरदासपुर जिले से संबंधित युवक मनजिंदर सिंह की बहन गुरपिंदर कौर ने थाना फतेहगढ़ चूड़ियां में शिकायत दर्ज करवाई कि उसके भाई को विदेश भेजने के नाम पर हरजीत मसीह और उसके साथी राजबीर सिंह द्वारा धोखाधड़ी की गई। शिकायत के अनुसार करीब 2 लाख रुपये लेकर पहले मनजिंदर सिंह को दुबई ले जाया गया और बाद में इराक भेज दिया गया, जहां नौकरी का झांसा देकर उसे फंसा दिया गया।

शिकायत के अनुसार एक बार मनजिंदर सिंह किसी भारतीय महिला की मदद से वापस भारत आ गया था, लेकिन हरजीत मसीह ने उसे दोबारा यह भरोसा दिया कि वह उसे अपने साथ फिर विदेश ले जाएगा और वहां नौकरी लगवाएगा। इस दौरान उसे दोबारा इराक ले जाया गया, जहां वह फिर फंस गया। परिवार के अनुसार 15 जून 2014 को उसका फोन बंद हो गया था और बाद में हरजीत मसीह ने बताया कि इस्लामिक स्टेट द्वारा उसे गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है। इस संबंध में पुलिस द्वारा धारा 420, 406, 370, 34 आईपीसी तथा इमिग्रेशन एक्ट 1983 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

मामले की पैरवी कर रहे वकील मनीष कुमार के अनुसार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रणजीत पाल सिंह चीमा की अदालत में लंबी सुनवाई के दौरान पेश सबूतों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत द्वारा हरजीत मसीह और राजबीर सिंह को बरी कर दिया गया है।

वकील ने कहा कि इराक में मारे गए 39 भारतीयों के परिवारों को केंद्र सरकार द्वारा मुआवजा और अन्य सुविधाएं दी गई थीं, लेकिन जो व्यक्ति मौत के मुंह से बचकर वापस आया उसे लगभग 10 वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। अब आगे संबंधित पक्ष द्वारा न्याय और अन्य अधिकारों के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

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