सुखजिंदर रंधावा ने पत्र लिख कर कहा- एस.जी.पी.सी. रद्द करे टैंडर

Edited By Vaneet,Updated: 11 Jul, 2020 01:04 PM

sukhjinder randhawa wrote a letter and said sgpc cancel tender

पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौं...

चंडीगढ़(विशेष): पंजाब के कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष गोबिंद सिंह लौंगोवाल को पत्र लिख कर एस.जी.पी.सी. द्वारा पुणे की एक कंपनी सनोई डेयरी को दिए गए 60 करोड़ रुपए के देसी घी के टैंडर पर पुन: विचार करने की मांग की है। एस.जी.पी.सी. ने हाल ही में अपने अधीन आते 85 गुरुद्वारों में कड़ाह का प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले देसी घी की खरीद के लिए टैंडर लगाए थे। 

इन टैंडरों में पुणे की सनोई डेयरी ने सबसे कम रेट देकर बाजी मारी है। सुखजिंदर रंधावा ने लिखा है कि पंजाब के अपने को-आप्रेटिव विभाग द्वारा मिल्कफैड ब्रांड के तहत बनाए जा रहे देसी घी के निर्माण में 99 प्रतिशत सिख दूध उत्पादकों का योगदान है। ये सिख दूध उत्पादक एस.जी.पी.सी. द्वारा पंजाब भर में लगाए जाने वाले लंगर में भारी योगदान देते हैं लेकिन पंजाब के बाहर की कंपनी को देसी घी का टैंडर दिए जाने का असर इन दूध उत्पादकों पर भी पड़ेगा। लिहाजा इस पर दोबारा विचार होना चाहिए। रंधावा ने एस.जी.पी.सी. के पूर्व अध्यक्ष गुरचरण सिंह टोहड़ा का हवाला देते हुए पत्र में लिखा है कि टोहड़ा ने हमेशा सिख पंथ को ध्यान में रखते हुए एस.जी.पी.सी. के फैसले लिए। वह अक्सर कहा करते थे कि एस.जी.पी.सी. व्यापारिक संस्था नहीं है और इसका काम सिखों के हितों के लिए काम करना है। टोहड़ा कहा करते थे कि वह गोल्डन टैम्पल के बाहर बनी एस.जी.पी.सी. की दुकानें किसी नास्तिक व्यक्ति को दस गुना महंगे किराए की बजाय किसी गरीब सिख व्यक्ति को कम किराए पर देना पसंद करेंगे।

रंधावा ने पत्र में पुणे की कंपनी द्वारा सप्लाई किए जाने वाले देसी घी की क्वालिटी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि कंपनी ने मिल्कफैड के मुकाबले काफी कम रेट दिए हैं। मिल्कफैड पंजाब के दूध उत्पादकों के हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें दूध की अच्छी कीमत देती है और मिल्कफैड के उत्पाद गुणवत्ता के मानकों पर भी खरे हैं, लिहाजा मिल्कफैड ने एस.जी.पी.सी. के टैंडर के लिए जो रेट दिए थे उनसे कम रेट पर देसी घी की डिलीवरी मुमकिन नहीं थी। इस बीच पुणे की कंपनी सनोई डेयरी का दावा है कि उसके साथ महाराष्ट्र,तेलंगाना और कर्नाटक के करीब 75000 दूध उत्पादक जुड़े हुए हैं और वह एस.जी.पी.सी. को अच्छी क्वालिटी का देसी घी मुहैया करवाएगी।

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