Edited By Urmila,Updated: 03 Mar, 2026 10:39 AM
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ए.बी.पी.एस.) की वार्षिक बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में आयोजित होने जा रही है।
जालंधर (अनिल पाहवा): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ए.बी.पी.एस.) की वार्षिक बैठक 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में आयोजित होने जा रही है। तीन दिवसीय इस अहम बैठक में यू.जी.सी. इक्विटी नियमों, जनसांख्यिकीय बदलाव, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठनात्मक कार्यक्रमों जैसे कई समकालीन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार इस बैठक में संघ के शीर्ष नेतृत्व सहित सरसंघचालक मोहन भागवत, प्रांत प्रचारक और देशभर से आए प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही संघ से जुड़े 30 से अधिक अनुषंगी संगठनों जैसे भारतीय किसान संघ और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी। यह वार्षिक बैठक संगठन की नीतिगत दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बताया जा रहा है कि यू.जी.सी. इक्विटी रैगुलेशंस 2026 इस बैठक का प्रमुख विषय बनकर उभर सकता है। इन नियमों को लेकर उच्च शिक्षा नीति में बहस तेज हो गई है। एक ओर सामान्य वर्ग के कुछ समूह इन नियमों से असंतोष जता रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए स्थगन आदेश के बाद ओ.बी.सी. और दलित समुदायों में भी नाराजगी देखी जा रही है। संघ के भीतर यह चिंता जताई जा रही है कि ऐसे विवाद समाज में विभाजन की स्थिति पैदा कर सकते हैं, जबकि संगठन का जोर सामाजिक एकता बनाए रखने पर है।
बैठक में जनसंख्या असंतुलन और जनसांख्यिकीय बदलाव पर भी विशेषचर्चा होने की उम्मीद है। खासकर असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की स्थिति पर फोकस किया जा सकता है, जहां आगामी चुनावों को देखते हुए जनसांख्यिकीय राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनते जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ और उसकी पहचान से जुड़े विषय भी चर्चा के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सतर्कता, ऑप्रेशन सिंदूर के संदर्भ में सुरक्षा रणनीति, युवाओं की भागीदारी और संगठन के शताब्दी वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। संघ के 'पंच परिवर्तन' प्रकल्प जिसमें सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन और नागरिक कर्त्तव्यों पर जोर दिया जाता है, को आगे बढ़ाने की रूपरेखा भी तय की जा सकती है।
संघ सूत्रों के मुताबिक बैठक में 'मजबूत समाज के माध्यम से अटूट सुरक्षा' की अवधारणा पर चर्चा होगी, जिसमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के साथ आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण को जोड़ने पर विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही विजयादशमी उत्सव, गृह संपर्क अभियान, हिंदू सम्मेलनों, युवा सम्मेलनों और सामाजिक समरसता बैठकों जैसे विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा भी की जाएगी।
बैठक के दौरान 2025-26 के दौरान संघ गतिविधियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और विभिन्न प्रांतों में चल रहे अभियानों का आकलन किया जाएगा। संघ के अनुसार इस बैठक में करीब 1,400 से अधिक कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें विभिन्न अनुषंगी संगठनों के अध्यक्ष, महासचिव और संगठन मंत्री मौजूद रहेंगे।
राजनीतिक दृष्टि से यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आगामी चुनावों से पहले सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर संगठन की रणनीति स्पष्ट हो सकती है। संघ के अंदरूनी सूत्रों का कहना है है कि तेजी से बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य के बीच संगठन समाज में एकता, संतुलन और समरसता बनाए रखने पर विशेष जोर देगा।
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