Punjab : सड़कों पर दौड़ रही कई अनफिट बसें, सवालों के घेरे में RTA विभाग

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 22 Sep, 2025 05:14 PM

punjab buses plying on roads without fitness

वैसे तो रोजाना किसी न किसी बात को लेकर आर.टी.ए. विभाग चर्चा में बना रहता है लेकिन इन दिनों शहर में बिना फिटनैस सर्टीफिकेट, बिना किसी टैक्स के और बिना किसी इंश्योरैंस के शहर में चल रही बसों को लेकर विभाग चर्चा का विषय बना हुआ है।

पटियाला (अत्री) : वैसे तो रोजाना किसी न किसी बात को लेकर आर.टी.ए. विभाग चर्चा में बना रहता है लेकिन इन दिनों शहर में बिना फिटनैस सर्टीफिकेट, बिना किसी टैक्स के और बिना किसी इंश्योरैंस के शहर में चल रही बसों को लेकर विभाग चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके बारे में एक खुलासा हुआ है कि इस समय शहर में 4155 , 7425 , 3875 , 7156 ( पूरे नंबर विभाग को दे दिए गए हैं) नंबर की बसें चल रही हैं, जिनमें से 4155 नंबर बस का फिटनैस सर्टीफिकेट 1 जून 2024 को और टैक्स 30 सितम्बर 2023 को और इंश्योरैंस 9 मई 2024 को खत्म हो चुका है।

इसी तरह से बस नंबर 7425 जिसे उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा 23 मार्च 2023 को ब्लैक लिस्ट किया गया है और इस बस की फिटनैस 23 नवम्बर 2022 को और इसका टैक्स 28 फरवरी 2021 को और इंश्योरैंस 18 अप्रैल 2023 को खत्म हो चुका है। बस नंबर 3875 जिसे राजस्थान सरकार के द्वारा ब्लैक लिस्ट किया गया है, की फिटनैस 13 नवम्बर 2016 को, टैक्स 31 मार्च 2017 को और इंश्योरैंस 28 दिसम्बर 2014 को खत्म हो चुका है।

बस नंबर 7156 की फिटनैस 11 अप्रैल 2025 को, टैक्स 30 सितम्बर 2023 को और इंश्योरैंस 20 सितम्बर 2023 को खत्म हो चुका है लेकिन इस सब के बावजूद उक्त चारों बसे इस समय पंजाब की सड़कों पर दौड़ रही हैं जो कि किसी भी समय आम लोगों के लिए किसी बड़ी दुर्घटना की वजह हो सकती है लेकिन आर.टी.ए. विभाग मौन है।
 
बिना मिली भगत के कैसे चल रही हैं अनफिट बसें

वैसे तो सरकार के द्वारा आम लोगों को सुरक्षा देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत देखने पर यह दावे हवा में ही होते हुए प्रतीत होते हैं। इसकी ताजा उदाहरण उक्त चार बसें हैं जो कि इस समय बिना किसी फिटनैस के, बिना इंश्योरैंस के, बिना किसी टैक्स के सड़क पर चल रही हैं, जबकि आर.टी.ए. विभाग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इस तरह की बसों की जांच करके उन पर कार्रवाई करें, लेकिन जिस तरह से यह बसें सड़कों पर घूम रही हैं, उससे साफ जाहिर है कि या तो आर.टी.ए. विभाग के अधिकारियों की उक्त बस मालिकों के साथ मिलीभगत है या वह अपना काम ईमानदारी के साथ नहीं करते। दोनों ही सूरतों मैं अधिकारियों की गलती का खामियाजा जहां आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है, वहीं सरकार को भी लाखों रुपए का चुना लग रहा है।
 

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