Edited By Subhash Kapoor,Updated: 04 May, 2023 09:11 PM

एक तरफ जहां पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, पत्रकार की कलम से लिखा गया हर एक शब्द सच्चाई की आवाज होती है, जिसे आज तक कोई भी दवा नहीं पाया।
अमृतसर (सागर) : एक तरफ जहां पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, पत्रकार की कलम से लिखा गया हर एक शब्द सच्चाई की आवाज होती है, जिसे आज तक कोई भी दवा नहीं पाया। हमारे देश में कुछ ऐसे भी महान पत्रकार हैं जिन्होंने सच्चाई की खातिर अपनी जान तक की परवाह नहीं की। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में सच्चाई के सिवा और कुछ नहीं लिखा, लेकिन अब पहले के समय की पत्रकारी और आज के समय की पत्रकारी में जमीन आसमान का फर्क आ गया है। पहले के समय में कुछ चंद पत्रकार हुआ करते थे लेकिन अब जब से सोशल मीडिया का दौर शुरू हुआ है, तब से हर कोई अपने आप को पत्रकार समझने लगा है। एक मामला आज अमृतसर में देखने को मिला है अमृतसर के बस स्टैंड के पास ट्रैफिक पुलिस ने जब एक शख्स को ट्रैफिक पुलिस द्वारा रोका गया तो उस शख्स को अपनी गाड़ी के कागज वह लाइसेंस दिखाने के लिए कहा लेकिन उस शख्स के द्वारा ट्रैफिक पुलिस को कहा गया कि मैं एक पत्रकार हूं और मेरे पास प्रेस का कार्ड है। जब पुलिस के द्वारा उसको कार्ड दिखाने के लिए कहा गया तो उसने तुरंत ही प्रेस का कार्ड दिखाया, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने अमृतसर के एक पत्रकार को बुलाकर उसका प्रेस का कार्ड बाइक आइडिया चेक करवाई तो पता चला कि यह एक नकली पत्रकार है। उसी वक्त पुलिस के द्वारा उस नकली पत्रकार को हिरासत में लेकर उसके प्रेस के कार्ड वह माइक आईडिया जब्त कर उस नकली पत्रकार पर कानूनी कार्रवाई करनी शुरू कर दी