Punjab: ऑनलाइन बुकिंग अभी भी बंद, शिखर पर पहुंची घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी

Edited By Kamini,Updated: 04 May, 2026 11:41 AM

online booking for cylinders is still suspended

मिडल ईस्ट जंग का नाम लेकर सप्लाई कम होने का हवाला देते हुए जहां आम आदमी को घरेलू सिलेंडर लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और ऑनलाइन बुकिंग अभी भी बंद चल रही है तो वहीं घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी इस समय शिखर पर पहुंच चुकी है।

अमृतसर (नीरज) : मिडल ईस्ट जंग का नाम लेकर सप्लाई कम होने का हवाला देते हुए जहां आम आदमी को घरेलू सिलेंड लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और ऑनलाइन बुकिंग अभी भी बंद चल रही है तो वहीं घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी इस समय शिखर पर पहुंच चुकी है। जिला प्रशासन व संबंधित विभाग इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। कमर्शियल गैस सिलैंडर के दाम 3201 रुपए तक पहुंच चुके हैं और लगभग एक हजार रुपए तक कीमत में बढ़ौतरी कर दी गई है। इससे घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी और बढ़ेगी व आम जनता पर महंगाई की मार भी पड़ेगी क्योंकि व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने सारा बोझ आम जनता पर ही डालना है। होटलों, रैस्टोरैंटों व ढाबों आदि में खाने पीने की वस्तुएं और ज्यादा महंगी हो जाएंगी।

गेहूं की सरकारी खरीद का हवाला देकर कार्रवाई करने से मुंह फेर रहा विभाग

गेहूं की फसल कट चुकी है और इस समय अनाज मंडियों में गेहूं के अंबार लगे हुए हैं। ऐसे में फूड सप्लाई विभाग से लेकर पूरा जिला प्रशासन गेहूं खरीद करने में व्यस्त है और इसका बहाना बनाकर कालाबाजारी करने वाली गैस एजैंसियों पर कार्रवाई करने से मुंह फेर रहा है जबकि रेहड़ियों से लेकर ढाबों व बड़े होटलों तक में घरेलू गैस सिलैंडरों का प्रयोग होते देखा जा रहा है। इस मामले में संबंधित विभाग की मिलीभुगत भी सामने आ रही है।

के.वाई.सी. के नाम पर 200 रुपए की हो रही वसूली

घरेलू गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी के साथ-साथ कुछ गैस एजैंसियां के.वाई.सी. के नाम पर उपभोक्ताओं से 200 रुपए की नाजायज वसूली कर रही हैं जबकि के.वाई.सी. के नाम पर सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार की फीस निर्धारित नहीं की गई है। जब कोई जानकार व्यक्ति ऐसा करने वाली गैस एजैंसी से सवाल करता है तो कहा जाता है कि सुरक्षा पाइप बदलने के लिए रुपए लिए जा रहे हैं लेकिन यह आप्शनल है, का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

400 से सिमट कर 28 रुपए हुई सबसिडी

घरेलू सिलैंडरों पर सरकार की तरफ से दी जाने वाली सबसिडी भी नाम की सबसिडी रह गई है। कभी 400 रुपए या इससे भी ज्यादा की सबसिडी घरेलू सिलैंडर पर दी जाती थी लेकिन इस समय यह सबसिडी सिर्फ 28 रुपए तक सिमटकर रह गई है और किस बैंक खाते में आती है वह भी पता नहीं चलता है। लोगों का कहना है कि यह सबसिडी भी बंद कर देनी चाहिए।

डिलीवरी मैन्स को वेतन देने की बजाय किया जाता है ठेका

गैस सिलैंडरों की डिलीवरी करने वाले कर्मचारियों को कुछ गैस एजैंसियों की तरफ से वेतन देने की बजाय ठेका किया जाता है। कर्मचारियों को 25 से 30 सिलैंडर दिए जाते हैं और होम डिलीवरी करने पर 30 रुपए से लेकर 50 रुपए या इससे भी ज्यादा नाजायज वसूली की जाती है। रेहड़ियों या ढाबों आदि में तो तीन गुना ज्यादा दाम पर ब्लैक में घरेलू सिलैंडर बेच दिया जाता है।

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