Edited By Vatika,Updated: 23 Sep, 2026 10:22 AM

पंजाब में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है।
पंजाब डेस्क: पंजाब में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। स्मार्ट राशन कार्ड सत्यापन ड्यूटी में शामिल नहीं होने वाले शिक्षकों को अब जिला प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। अकेले लुधियाना जिले में 314 शिक्षकों को नोटिस भेजे गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि पहले से ही कई अतिरिक्त सरकारी जिम्मेदारियां उनके पास हैं, जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
दरअसल, स्मार्ट राशन कार्ड के सत्यापन के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। 11 सितंबर को आयोजित विशेष प्रशिक्षण सत्र में अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। लुधियाना के अलावा अमृतसर, बरनाला सहित राज्य के कुछ अन्य जिलों में भी शिक्षकों को नोटिस दिए गए हैं। लुधियाना जिले के भदौड़, तलवंडी, भोतना, टिंकौने, भदौड़ और तपा क्षेत्र के शिक्षकों को भी नोटिस मिले हैं। तपा SDM कार्यालय की ओर से 11 शिक्षकों को भेजे नोटिस में कहा गया कि उन्हें 4 सितंबर से राशन कार्ड सत्यापन का कार्य सौंपा गया था, लेकिन निर्धारित समय तक कोई सत्यापन रिपोर्ट नहीं मिली। नोटिस में निर्धारित समय तक काम पूरा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
शिक्षकों ने जताई आपत्ति
शिक्षकों का कहना है कि साल के इस समय उन पर पहले से ही कई अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं। इनमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जनगणना, ड्रग सर्वे, पराली जलाने से रोकने संबंधी कार्य, स्थानीय निकाय चुनाव, खेतों में पानी की स्थिति, स्वास्थ्य कार्ड और बाढ़ से संबंधित ड्यूटी शामिल हैं। शिक्षक संगठनों ने जिला प्रशासन के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के अध्यक्ष विक्रम देव सिंह ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को सत्यापन ड्यूटी पर न जाने के लिए कहे जाने का संदेश तब तक प्रभावी नहीं माना जा सकता, जब तक राज्य सरकार की ओर से पहले की ड्यूटी से संबंधित औपचारिक आदेश वापस न लिए जाएं। वहीं, शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शिक्षक पहले से अधिक काम के दबाव में हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय कर राशन कार्ड सत्यापन का काम पूरा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पिछले महीने विधानसभा में बताया था कि राज्य में करीब 31,370 शिक्षक हैं, जो कुल स्वीकृत स्टाफ का लगभग एक-चौथाई हैं। उन्होंने मुख्य सचिव को भी पत्र लिखकर संबंधित विभागों को शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से स्थायी रूप से छूट देने के निर्देश जारी करने की बात कही थी।