Edited By Kalash,Updated: 15 Apr, 2026 11:24 AM

पंजाब सरकार द्वारा मिडल स्कूलों से अध्यापकों को डैपूटेशन पर भेजने के फैसले के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध तेज हो गया है।
अमृतसर (दलजीत): पंजाब सरकार द्वारा मिडल स्कूलों से अध्यापकों को डैपूटेशन पर भेजने के फैसले के खिलाफ पूरे राज्य में विरोध तेज हो गया है। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डी.टी.एफ.) ने इसे शिक्षा प्रणाली पर सीधा हमला बताते हुए सरकार की कड़ी निंदा की है। डी.टी.एफ. नेताओं ने बताया कि सरकार द्वारा जारी पत्र मुताबकि कम विद्यार्थियों वाले मिडल स्कूलों से बड़ी संख्या में अध्यापक निकालकर अधिक संख्या वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। नई नीति के तहत 1 से 30 विद्यार्थियों वाले स्कूलों में केवल 2 शिक्षक, 60 तक 3 और 90 तक 4 अध्यापक ही रखे जाएंगे, जबकि बाकियों को ‘अस्थायी व्यवस्था’ के तहत शिफ्ट किया जाएगा।
स्कूल बंद करने की तैयारी : डी.टी.एफ.
राज्य प्रधान विक्रमदेव सिंह, महासचिव महिंदर कौडियांवाली और वित्त सचिव अश्वनी अवस्थी ने कहा कि यह फैसला ग्रामीण स्कूलों को खत्म करने की ओर एक सोची-समझा कदम है। उन्होंने कहा कि पहले ही कई विषयों के अध्यापक हटाए जा चुके हैं और अब यह नीति विद्यार्थियों को विशेषज्ञ अध्यापको से वंचित कर देगी।
आर.टी.ई. कानून के उल्लंघन का आरोप
संगठन ने आरोप लगाया कि यह फैसला ‘शिक्षा का अधिकार कानून 2009’ का सीधा उल्लंघन है। अध्यापक की कमी कारण पहले ही स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है जबकि सरकार इसे और बदतर करने की ओर बढ़ रही है।
‘नई भर्तियों से पीछे हट रही सरकार’
डी.टी.एफ. नेताओं ने कहा कि सरकार नई भर्तियों से बचने के लिए ऐसे फैसले ले रही है और अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एस.ओ.ई. और पी.एम. स्कूलों को प्राथमिकता देकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की अनदेखी की जा रही है।
संघर्ष की चेतावनी
डी.टी.एफ. ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने यह फैसला तुरंत वापस नहीं लिया तो गांवों की पंचायतों और अभिभावकों को साथ लेकर सड़कों पर उतरकर तेज संघर्ष किया जाएगा।
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