मुसलाधार बारिश का कहर: बर्बाद हुआ लाखों का प्याज

Edited By Mohit,Updated: 13 Dec, 2019 05:01 PM

millions of onions have been wasted due to rain

पिछले करीब 36 घंटे से चल रही मुसलाधार बारिश ने शहर में कारोबार को चौपट करके रख दिया है।

होशियारपुर (जैन): पिछले करीब 36 घंटे से चल रही मुसलाधार बारिश ने शहर में कारोबार को चौपट करके रख दिया है। फगवाड़ा रोड स्थित नई सब्जी मंडी के कछुआ की चाल निर्माणाधीन शैड की गुणवत्ता की भी इस बारिश ने पोल खोल कर रख दी है। शैड के जिस भाग की छत पर शीटें डाली गई हैं उनमें से लगातार पानी रिसने के कारण आज लाखों रुपए का प्याज बर्बाद हो गया। सर्वाधिक नुक्सान प्रमुख आढ़ती हरचरन सिंह सचदेवा का हुआ है। उनके प्याज के सैंकड़ों तौड़े शैड के नीचे पड़े थे। आज सुबह जब वह मंडी पहुंचे तो उनके पैरों तले जमीन ही सरक गई। 100 रुपए किलो तक बिकने वाला प्याज शैड से टपक रहे पानी के कारण बर्बाद हो चुका था। जिससे उनकी व कुछ अन्य आढ़तियों का लाखों रुपए का नुक्सान हुआ।

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प्याज: पहले उपभोक्ताओं को रुलाया, अब आढ़ती आए चपेट में
प्याज की अत्याधिक बढ़ी कीमतों के चलते जहां पहले उपभोक्ता रो रहे हैं अब बारिश के कारण भारी नुक्सान के चलते प्याज के कारोबारी आढ़ती इसकी चपेट में आ गए हैं। इसी बीच सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कुलवंत सिंह ने बताया कि आढ़ती पिछले 1 साल से दुहाई दे रहे हैं कि शैड जल्द बनाया जाए तथा निर्माण कार्य की क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्हें मालूम था कि अगर शैड ठीक से बना तो बरसातों में बहुत बड़ा नुक्सान हो सकता है, और यही हुआ। उन्होंने बताया कि शैडों के नीचे पड़े आलू के तौड़ेे भी शैड की लीकेज के कारण खराब हुए हैं। उन्होंने बताया कि शैड का करीब आधा हिस्सा बिना छत के है। जिसके नीचे पड़ा स्टॉक खराब हो रहा है। 

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प्याज का कारोबार करने वाले एक अन्य प्रमुख आढ़ती कुलविन्द्र सिंह सचदेवा ने बताया कि बारिश के पानी से जो प्याज खराब हुआ है वो कौड़ियों के भाव बिकेगा। आढ़तियों को रहे इस नुक्सान का आखिर खमियाजा कौन भरेगा। मंडी में मौजूद अन्य आढ़तियों संदीप ठाकुर, राज कुमार, सतनाम सिंह, राज कुमार मलिक, जसवंत सिंह, राज कुमार मेहता, अशीष गांधी आदि ने बताया कि बारिश के पानी की निकासी न होने के कारण वैसे भी मंडी में नारकीय स्थिति बनी हुई है। चारों तरफ फैली गंदगी बारिश के दिनों में बदबू छोड़ने लगती है। जिसके चलते ग्राहक भी मंडी में खरीददारी करने से गुरेज करते हैं। आढ़तियों की मांग है कि साल भर में करोड़ों की मार्कीट फीस इकट्ठी करने वाली मार्कीट कमेटी को आढ़तियों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।

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