नीले ड्रम में झूठी शराब बरामदगी मामला, SHO समेत तीन पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

Edited By Urmila,Updated: 11 Apr, 2026 03:13 PM

major action gainst three police officers with sho of shahkot police station

शाहकोट पुलिस की एक कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है, जिसके बाद डिपार्टमेंट ने सख्त कार्रवाई करते हुए SHO समेत तीन पुलिस वालों को लाइन हाजिर कर दिया है।

शाहकोट : शाहकोट पुलिस की एक कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है, जिसके बाद डिपार्टमेंट ने सख्त कार्रवाई करते हुए SHO समेत तीन पुलिस वालों को लाइन हाजिर कर दिया है। यह जानकारी SSP हरविंदर सिंह विर्क द्वारा की गई है। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए संबंधित कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। मामले की गहन जांच जारी है और आगे जांच में जो भी दोषी पाया गया है उस पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

ssp harvinder singh virk

जानकारी के मुताबिक, 9 अप्रैल को शाहकोट थाने में अकरम नाम के एक शख्स के खिलाफ एक्साइज एक्ट के तहत केस नंबर 90 दर्ज किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि उसके घर से 35 लीटर लाहन बरामद हुई है। इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर एक CCTV फुटेज वायरल हुई, जिसमें पुलिस वाले खुद गाड़ी से एक ड्रम (कंटेनर) निकालकर आरोपी के घर के अंदर ले जाते दिख रहे हैं और बाद में वही ड्रम बाहर ले आते हैं। 

शुरुआती पूछताछ में कर्मचारियों ने बताया कि लाहन की रिकवरी के लिए बाहर से कंटेनर का इंतजाम करना पड़ता है और यह ड्रम रिकवरी के लिए ही अंदर ले जाया गया था। सी.सी.टी.वी. फुटेज ने पुलिस की इस बात को झूठा साबित कर दिया है। फुटेज में पुलिस की एक टीम सिल्वर रंग की इकोस्पोर्ट कार में नीले रंग का ड्रम लाते हुए दिख रही है। ड्रम खाली नहीं था, क्योंकि उसे दो लोग ले जा रहे थे। कैमरे में कुल सात पुलिस अधिकारी कैद हुए, जिनमें चार वर्दी में और तीन सादे कपड़ों में थे। महज 13 मिनट में नशे की बरामदगी का वीडियो रिकॉर्ड किया गया और ड्रम को सील करके ले जाया गया।

Blue Drum Fake Recovery

हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई के समय आरोपी अकरम घर पर मौजूद नहीं था। सवाल यह भी उठता है कि जब पूरे 13 मिनट की कार्रवाई के दौरान कोई कांटा नहीं था, तो पुलिस को कैसे पता चला कि ड्रम में 35 लीटर शराब है? हालांकि, वीडियो वायरल होने से पुलिस की छवि को हुए नुकसान को देखते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं।

कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच

इस मामले में एस.एच.ओ. इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह, ए.एस.आई. सुखविंदर सिंह और लेडी कांस्टेबल हवनप्रीत कौर को तुरंत प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। पूरे मामले की गहनता से जांच करने की जिम्मेदारी एसपी इन्वेस्टिगेशन विनीत लहावत (आईपीएस) को सौंपी गई है। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर कोई कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गांव वालों के मुताबिक, अकरम एक मजदूर और पॉलिटिकल कारकुन है। उसके खिलाफ दो केस दर्ज किए गए थे, एक मारपीट का और दूसरा धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ। उनका कहना है कि पता नहीं पुलिस उसे क्यों फंसाना चाहती थी।

इस केस ने पॉलिटिकल गलियारों में भी चर्चा छेड़ दी है। सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी ट्वीट कर सवाल उठाए हैं कि पुलिस खुद ही केस क्रिएट करती है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, उसका क्रिमिनल और एक्साइज से जुड़ा बैकग्राउंड रहा है।

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