Edited By Vatika,Updated: 02 Apr, 2026 11:14 AM

पंजाब में शराब ठेकों की अलॉटमैंट प्रक्रिया के तहत एक्साइज विभाग ने आज लंबित 25 में से 8 शराब समूह
जालंधर/चंडीगढ़(धवन) : पंजाब में शराब ठेकों की अलॉटमैंट प्रक्रिया के तहत एक्साइज विभाग ने आज लंबित 25 में से 8 शराब समूह (लिकर ग्रुप) अलॉट कर दिए हैं, जबकि अभी भी 17 समूह बाकी हैं, जिन्हें ई-टैंडर प्रक्रिया के जरिए भरा जाएगा। विभाग ने सभी समूहों की बिक्री सुनिश्चित करने के लिए एक बार फिर लाइसैंस फीस में 3 प्रतिशत की कटौती की है। इस ताजा कमी के साथ अब तक कुल 13 प्रतिशत लाइसैंस फीस घटाई जा चुकी है। ठेकेदारों का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें इन समूहों में भारी नुकसान उठाना पड़ा था, जिसके चलते इस बार वे नए ग्रुप लेने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे हैं। उनका मानना है कि मौजूदा नीतियों और प्रतिस्पर्धा के चलते कारोबार में लाभ की संभावना कम हो गई है।
एक्साइज विभाग कल फिर से कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के शराब समूहों के लिए ई-टैंडर जारी करेगा। इनमें चंडीगढ़ के नए क्षेत्र, भारतगढ़, सिटी सेंटर, टांडा, दसूहा, जालंधर के बीएमसी चौक और सोडल चौक, बलाचौर सिटी, कपूरथला-2, फगवाड़ा-2, बेगोवाल, पठानकोट बस स्टैंड, जुगियाल, परमानंद, बठिंडा-2 भारत नगर, फिरोजपुर कैंट और अबोहर सिटी-2 शामिल हैं। ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि राज्य में अंग्रेजी शराब की बिक्री को नियंत्रित किया जाए और केवल देसी शराब के दायरे में ही कारोबार को सीमित किया जाए। उनका तर्क है कि अंग्रेजी शराब के कारण बाजार में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, जिससे छोटे और मध्यम ठेकेदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके अलावा ठेकेदारों ने यह भी कहा कि बार-बार नीतियों में बदलाव और लाइसेंस फीस में कटौती के बावजूद सरकार को अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। उनका मानना है कि जब तक ग्राऊंड लेवल पर बिक्री की वास्तविक स्थिति और उपभोक्ता मांग को ध्यान में रखकर नीति नहीं बनाई जाएगी, तब तक शराब समूहों की अलॉटमैंट में दिक्कतें बनी रहेंगी। उन्होंने सरकार से स्थिर और दीर्घकालिक एक्साइज नीति लागू करने की मांग की है, ताकि कारोबार में भरोसा कायम हो सके। उधर, एक्साइज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं और ई-टैंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है। विभाग को उम्मीद है कि लाइसैंस फीस में कमी और नई टैंडर प्रक्रिया के चलते बचे हुए समूहों की भी जल्द अलॉटमैंट हो जाएगी। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा और राज्य को अपेक्षित राजस्व प्राप्त होगा।