CBSE का सख्त फरमान, गलती की तो Teachers होंगे सस्पेंड या Blacklist

Edited By Urmila,Updated: 18 Mar, 2026 10:59 AM

major action by cbse

सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन (चैकिंग) कार्य में जुटे अध्यापकों के लिए एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है।

लुधियाना (विक्की) : सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन (चैकिंग) कार्य में जुटे अध्यापकों के लिए एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉपियां चैक करने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय है और यदि किसी भी शिक्षक ने इससे जुड़ी कोई भी जानकारी, फोटो या निजी राय सोशल मीडिया पर सांझा की, तो इसे पेशेवर आचरण का उल्लंघन मानकर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, बोर्ड के संज्ञान में आया है कि कुछ शिक्षक फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मूल्यांकन से जुड़ी बातें लिख रहे हैं। कोई शिक्षक कॉपियों में लिखे उत्तरों का मजाक उड़ा रहा है, तो कोई मार्किंग स्कीम को लेकर भ्रामक दावे कर रहा है। सी.बी.एस.ई. ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट्स से छात्रों और अभिभावकों में बेवजह का तनाव और डर पैदा होता है। बोर्ड ने याद दिलाया है कि इवैल्यूएशन एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसकी गरिमा बनाए रखना हर शिक्षक की जिम्मेदारी है।

होगी जेल या सस्पैंशन जैसी कड़ी कार्रवाई

बोर्ड ने अपने सर्कुलर में चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अध्यापकों को सस्पैंड किया जा सकता है, उन्हें स्कूल से निकाला जा सकता है या भविष्य में बोर्ड की किसी भी ड्यूटी के लिए हमेशा के लिए बैन (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की पवित्रता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अध्यापकों से अपील की गई है कि वे सस्ते प्रचार के बजाय एक सच्चे प्रोफैशनल की तरह व्यवहार करें।

प्रिंसिपल्स को निगरानी बढ़ाने के निर्देश

सी.बी.एस.ई. ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपल्स को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्टाफ को इन नियमों के प्रति तुरंत जागरूक करें। प्रिंसिपल्स को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके स्कूल का कोई भी शिक्षक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हो जो बोर्ड की गोपनीयता को भंग करती हो। बोर्ड का यह कदम उन लाखों विद्यार्थियों के हित में है जो परीक्षा के बाद मानसिक दबाव में रहते हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचाया जा सके।

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