Edited By Vatika,Updated: 18 Aug, 2026 09:01 AM

आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और बिल बढ़ाने के चक्कर में समय
लुधियाना (राज): चंडीगढ़ रोड स्थित सेक्टर-32 के देव अस्पताल में देर रात एक बच्ची की मौत के बाद जमकर बवाल हुआ। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने और बिल बढ़ाने के चक्कर में समय पर बच्ची को रेफर न करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। देर रात तनावपूर्ण स्थिति की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद परिजनों को शांत करवाकर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मासूम ने तोड़ा दम
धरने पर बैठे पीड़ित परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्ची की हालत गंभीर होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें सही जानकारी नहीं दी। परिजनों का कहना है कि जब बच्ची की तबीयत में कोई सुधार नहीं हो रहा था, तो उन्होंने डॉक्टरों से बार-बार गुहार लगाई कि उसे किसी बड़े अस्पताल में रेफर कर दिया जाए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अपनी बात पर अड़े रहकर बच्ची को रोके रखा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में स्पेशलिस्ट डॉक्टर मौजूद नहीं थे। जब शाम के समय बच्ची की स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तो डॉक्टरों ने अचानक इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए और उसे तुरंत कहीं और ले जाने को कह दिया। इसके चलते दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। वही, देर रात जब अस्पताल के बाहर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा, तो पुलिस को सूचित किया गया।मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आक्रोशित परिजनों को समझा बुझाकर धरना समाप्त करवाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज और बच्ची की मेडिकल व स्कैन रिपोर्ट्स की बारीकी से जांच करने के बाद कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
अगर बच्ची ठीक होती तो हम स्कैन क्यों करवाते?
उधर, दूसरी ओर देव अस्पताल के डॉ. पवन ढींगरा ने परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि "बच्ची दोपहर करीब 1:30 बजे घर की छत से गिरने के बाद गंभीर हालत में हमारे पास लाई गई थी। हमने स्थिति को देखते हुए तुरंत इमरजेंसी प्राथमिक उपचार दिया और दौरे रोकने के लिए इंजेक्शन लगाया। हमने बच्ची को पक्के तौर पर एडमिट नहीं किया था, बल्कि तुरंत स्कैन के लिए भेज दिया था। शाम 5 बजे स्कैन करवाकर लौटने पर हमें फोन पर ही पता चल गया था कि सिर में क्लॉट बन चुके हैं और ब्रेन हेमरेज है। बच्ची शुरू से बेहोश थी और हमने शाम 5 बजे ही परिजनों को स्पष्ट कह दिया था कि इसे तुरंत किसी बड़े अस्पताल ले जाएं। अगर बच्ची ठीक होती तो हम स्कैन क्यों करवाते? हमारे पास अस्पताल की पूरी सीसीटीवी फुटेज मौजूद है।"