लुधियाना के कार्कस प्लाट में करोड़ों की कथित चोरी पर विवाद, कुमार गौरव सच्चा यादव ने उठाए सवाल

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 26 May, 2026 05:36 PM

controversy over multi crore theft at ludhiana s carcass plot

लुधियाना के हम्बरां रोड स्थित नूरपुर बेट-लड्डोवाल के नजदीक नगर निगम के कार्कस प्लाट में हुई कथित करोड़ों रुपये की चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। समाजसेवी कुमार गौरव सच्चा यादव ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो जारी कर पूरे मामले को लेकर नगर निगम...

लुधियाना, ( गणेश / सचिन ) : लुधियाना के हम्बरां रोड स्थित नूरपुर बेट-लड्डोवाल के नजदीक नगर निगम के कार्कस प्लाट में हुई कथित करोड़ों रुपये की चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। समाजसेवी कुमार गौरव सच्चा यादव ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो जारी कर पूरे मामले को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और कथित चोरी की परिस्थितियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही उन्होंने विजीलैंस और ई.डी. से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है।

सच्चा यादव ने दावा किया कि नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से यह कार्कस प्लांट मरे हुए पशुओं के निस्तारण के लिए बनाया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पिछले लगभग चार वर्षों से यह प्लांट बंद पड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो प्लांट को शुरू किया गया और न ही उसकी सही तरीके से देखरेख की गई।

उन्होंने कहा कि 14 मई 2026 को इसी कार्कस प्लाट से करीब 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक की मशीनरी, जनरेटर, मोटर, शेड और अन्य भारी सामान चोरी होने की बात सामने आई। यह मामला इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि प्लाट चारों तरफ लगभग 10-10 फुट ऊंची दीवारों, मजबूत गेटों और बाउंड्री से घिरा हुआ है।

वीडियो में सच्चा यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इतनी भारी मशीनरी और सामान बिना किसी वाहन के कैसे बाहर ले जाया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या चोर दीवार फांदकर ट्रकों सहित अंदर पहुंचे और करोड़ों का सामान कंधों पर उठाकर ले गए? मौके पर किसी भी दीवार के टूटने या जबरन प्रवेश के निशान स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे।

उन्होंने बताया कि मौके पर आज भी काफी सामान, जनरेटर, मोटर और मशीनरी खुले में पड़ी हुई है। वहीं एक स्थानीय कबाड़ी से बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इतना भारी औद्योगिक सामान उठाने और शिफ्ट करने में सामान्य तौर पर कई दिन से लेकर एक महीने तक का समय लग सकता है।

मामले में लाडोवाल थाना एस.एच.ओ. से हुई बातचीत का हवाला देते हुए सच्चा यादव ने बताया कि 15 मई 2026 को एक नेपाली चौकीदार द्वारा शिकायत दर्ज करवाई गई थी। बताया जा रहा है कि उक्त चौकीदार पिछले चार वर्षों से नगर निगम की तरफ से वहीं तैनात था और अपने परिवार सहित प्लाट परिसर में बने कमरे में रहता था। शिकायत देने के बाद से उसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, जिससे मामला और अधिक संदेहास्पद बनता जा रहा है।

वीडियो में यह भी दावा किया गया कि प्लाट में दो कैमरे बाहर और एक कैमरा अंदर लगाया गया था। लेकिन बाहरी कैमरों में केवल निशान दिखाई दिए जबकि अंदर लगे कैमरे में न तो वायरिंग थी और न ही वह किसी सिस्टम से जुड़ा हुआ दिखाई दिया। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सच्चा यादव ने कहा कि पिछले चार वर्षों से प्लांट की न तो सफाई हुई और न ही उचित देखरेख। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी की घटना के पांच दिन बाद यानी 19 मई 2026 को निजी कंपनी भुल्लर सिक्योरिटी के माध्यम से दो सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए। इनमें एक गार्ड की ड्यूटी सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक और दूसरे की शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक लगाई गई।

भुल्लर सिक्योरिटी के कर्मचारियों से बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी को केवल चोरी की जानकारी दी गई थी, लेकिन चोरी कैसे हुई इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं थी। कंपनी प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि 18 मई 2026 को उन्होंने प्लाट का निरीक्षण किया था, जहां कैमरे तो लगे हुए थे लेकिन उनमें वायरिंग नहीं थी।

वहीं एस.एच.ओ. ने कथित तौर पर बताया कि नेपाली चौकीदार ने शिकायत में लिखा था कि 1.5 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक का सामान चोरी हो गया है। चौकीदार के अनुसार घटना वाली रात तेज आंधी और अंधेरा होने के कारण चोरी की भनक नहीं लग सकी।

सच्चा यादव ने कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति और जनता के टैक्स के पैसों से बने प्रोजेक्ट की सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये की सरकारी मशीनरी गायब हुई है तो इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए और मामले में शामिल हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यादव का कहना है कि उक्त 2 करोड रुपए के सामान की सच में चोरी हुई या कोई घोटाला हुआ, इसकी जांच विजिलेंस और ई.डी. जैसी एजेंसियों से जरूर करवानी चाहिए। क्योंकि मामला करोड़ों का है भाई। क्योंकि यह मामला जनता की खून पसीने के करोड़ों रुपए का है।  

उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की विजीलैंस, ई.डी. और अन्य स्वतंत्र एजेंसियों से निष्पक्ष जांच करवाई जाए ताकि सच जनता के सामने आ सके और भविष्य में सरकारी संपत्ति के साथ इस प्रकार की लापरवाही दोबारा न हो।

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