Edited By Kalash,Updated: 26 Jan, 2026 06:46 PM

पंजाबी यूनिवर्सिटी में एक ताजा शोध के माध्यम से एक उच्च-गुणवत्ता वाली ऐसी मेडिकल इमेजिंग तकनीक विकसित की गई है
पटियाला (मनदीप जोसन): पंजाबी यूनिवर्सिटी में एक ताजा शोध के माध्यम से एक उच्च-गुणवत्ता वाली ऐसी मेडिकल इमेजिंग तकनीक विकसित की गई है, जो मानव अंगों की पहचान करने की शुद्धता में महत्वपूर्ण सुधार कर सकती है। यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग से डॉ. नवजोत कौर और डॉ. निर्वैर नीरू के नेतृत्व में शोधार्थी डॉ. हरिंदर कौर द्वारा किया गया यह शोध ‘पेट के सी.टी. स्कैन चित्रों के माध्यम से एक से अधिक अंगों की पहचान’ से संबंधित है। यह तकनीक जटिल प्रकार के सी.टी. स्कैनों में अंगों की सीमाओं की स्पष्ट पहचान करते समय उत्पन्न होने वाली चुनौती का समाधान करती है।
शोधार्थी डॉ. हरिंदर कौर ने बताया कि यह शोध एक नई दो-चरणीय विधि प्रस्तुत करता है, जो इस क्षेत्र में पहले उपलब्ध कई ‘डीप-लर्निंग’ मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन करती है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का पहला चरण अंगों (जैसे यकृत, एओरटा और प्लीहा) के सूक्ष्म आकार और सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए संबंधित चित्र के कंट्रास्ट को काफी बढ़ाता है। इसमें ‘वेटिड ग्रे वुल्फ ऑप्टिमाइजेशन’ (जी.डब्ल्यू.ओ.) एल्गोरिद्म का उपयोग किया गया है। दूसरे चरण में ‘एक्स-डेंसनेट’ आर्किटेक्चर का उपयोग किया गया है, जो सिस्टम को अंगों की आंतरिक विशेषताओं को समझने में मदद करता है, जिससे अत्यंत सटीक और बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
डॉ. नवजोत कौर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानक डाटासेट्स (फ्लेयर 22 और बी.टी.सी.वी.) की तुलना में इस तकनीक ने शानदार परिणाम दिखाए हैं। एओरटा की पहचान में इसने 0.9938 का स्कोर प्राप्त किया, जो कि मौजूदा ‘डिफ्यूजन मॉडल’ से भी कहीं अधिक है। प्लीहा की पहचान में भी 0.9833 का उच्च स्कोर हासिल किया गया है। डॉ. निर्वैर नीरू ने बताया कि इस शोध को पहले ही अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिल चुकी है। यह शोध कार्य उच्च-मानक वाले जर्नल ‘डिस्प्लेज़’ (एल्सेवियर, एस.सी.आई.-इंडेक्स्ड), स्कोपस-इंडेक्स्ड जर्नल तथा कई आई.ई.ई.ई. सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुका है।
उप-कुलपति डॉ. जगदीप सिंह ने मेडिकल ए.आई. के क्षेत्र में दिए गए इस योगदान के लिए शोध टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि हमारे शोधार्थी यूनिवर्सिटी को मेडिकल इमेजिंग इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में भी आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी ऐसे शोधों के लिए प्रतिबद्ध है जो वास्तविक जीवन में प्रभाव डालने वाले हों। उन्होंने कहा कि यह तकनीक रेडियोलॉजिस्टों को तेज़ी से और जीवन बचाने वाले फैसले लेने में सहायता करेगी।
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