30 लाख रिश्वत के आरोपों से मचा सियासी भूचाल, विधायक ने भेजा कानूनी नोटिस

Edited By Kalash,Updated: 28 Jan, 2026 05:20 PM

30 lakh bribe case legal notice

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौड़ मंडी में हुआ एक मामूली सा कुर्सी विवाद अब बड़े राजनीतिक और कानूनी टकराव में तब्दील हो गया है।

बठिंडा (विजय वर्मा): 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर मौड़ मंडी में हुआ एक मामूली सा कुर्सी विवाद अब बड़े राजनीतिक और कानूनी टकराव में तब्दील हो गया है। राष्ट्रीय पर्व की गरिमा को तार–तार करते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना और नगर काउंसिल अध्यक्ष के बीच हुआ विवाद अब अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है।

जानकारी के अनुसार, 26 जनवरी को आयोजित सरकारी समारोह के दौरान नगर काउंसिल अध्यक्ष के लिए आरक्षित कुर्सी पर विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना द्वारा अपने एक करीबी व्यक्ति को बैठा दिया गया। इस पर नगर काउंसिल अध्यक्ष ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि मंच पर ही तू–तू मैं–मैं और धक्का–मुक्की जैसी स्थिति बन गई, जिससे पूरे समारोह की गरिमा पर सवाल खड़े हो गए।

इसी दौरान नगर काउंसिल अध्यक्ष ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अध्यक्ष पद दिलाने के बदले 30 लाख रुपये की रिश्वत ली गई है। यह आरोप सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे विवाद और भड़क गया।

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अब इस मामले को लेकर विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना ने अपने वकील के माध्यम से नगर काउंसिल अध्यक्ष को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में विधायक ने स्पष्ट किया है कि 30 लाख रुपये रिश्वत लेने के आरोप पूरी तरह झूठे, निराधार और उनकी छवि को धूमिल करने वाले हैं। नोटिस में 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विधायक द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद नगर काउंसिल अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो यह मामला जल्द ही अदालत में पहुंच सकता है।

कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व पर हुआ यह कुर्सी विवाद न केवल राजनीतिक तनाव को उजागर करता है, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा और सार्वजनिक कार्यक्रमों की गरिमा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें नगर काउंसिल अध्यक्ष के जवाब पर टिकी हैं कि यह मामला सुलझता है या अदालत में नया मोड़ लेता है।

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