2027 चुनाव : Punjab में धार्मिक गुरु करा सकते हैं बड़ी सियासी सुलह! चर्चाओं का बाज़ार गर्म

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 07 Mar, 2026 05:54 PM

can religious leaders broker a major political reconciliation in punjab

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और रैलियों व सभाओं के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए राजनीतिक जानकारों का...

बठिंडा (विजय वर्मा): पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं और रैलियों व सभाओं के जरिए जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मौजूदा हालात को देखते हुए राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में आम आदमी पार्टी के लिए राह आसान नहीं रहने वाली।

विशेषज्ञों का कहना है कि सत्ता में आने से पहले आम आदमी पार्टी ने पंजाब की जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन कई मुद्दों पर अपेक्षित नतीजे सामने न आने से लोगों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। विपक्षी दल भी लगातार सरकार को घेरने में लगे हुए हैं, जिसके कारण यह चर्चा तेज है कि 2027 के चुनावों में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लग सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अगर शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन हो जाता है तो पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दोनों दलों का गठबंधन होने पर सत्ता की लड़ाई काफी दिलचस्प हो सकती है और यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। हालांकि अभी तक भाजपा की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जबकि अकाली दल के कई वरिष्ठ नेता खुलकर गठबंधन की बात कर चुके हैं।

सियासी हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि देश के एक बड़े धार्मिक गुरु दोनों दलों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर भारत की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर कांग्रेस भी सत्ता की दौड़ में खुद को मजबूत दावेदार मान रही है, लेकिन पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाल ही में बरनाला रैली के दौरान राहुल गांधी ने नेताओं को आपसी मतभेद खत्म करने और एकजुट होकर चुनाव लड़ने के निर्देश दिए थे, मगर अभी तक इसका असर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर कांग्रेस हाईकमान राज्य के सभी गुटों को एक मंच पर लाने में सफल हो जाता है तो पार्टी सत्ता के काफी करीब पहुंच सकती है। लेकिन अगर गुटबाजी जारी रही तो इसका फायदा विरोधी दलों को मिल सकता है। कुल मिलाकर 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पंजाब की राजनीति में अभी से हलचल तेज हो गई है।

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